देहरादून: उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए संबंधित विभाग तैयारियों में जुटे हैं। इसी कड़ी में हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की ओर से लोकभवन में एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें “चारधाम यात्रा के दौरान चिकित्सा समस्याएं और सड़क दुर्घटना सुरक्षा उपाय” विषय पर विस्तार से चर्चा हुई।
सेमिनार में विशेषज्ञों ने विशेष रूप से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं, खासकर हाई एल्टीट्यूड सिकनेस (ऊंचाई पर होने वाली बीमारी) से बचाव और यात्रा से पहले की तैयारियों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। इस दौरान सुरक्षित चारधाम यात्रा के लिए “पिलग्रिमेज एजुकेशन हैंडबुक” का भी विमोचन किया गया, जिसमें यात्रियों के लिए जरूरी सावधानियों और दिशा-निर्देशों को विस्तार से शामिल किया गया है।
कार्यक्रम में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि चारधाम यात्रा से जुड़े लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आस्था के साथ सावधानी ही इस यात्रा का मूल मंत्र होना चाहिए। साथ ही यात्रियों को यात्रा से पहले स्वास्थ्य परीक्षण कराने और विशेष रूप से बुजुर्गों को चिकित्सकीय सलाह लेकर ही यात्रा करने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय मार्ग जितने सुंदर हैं, उतने ही संवेदनशील भी हैं, जहां दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे में सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी है। राज्यपाल ने ‘गोल्डन आवर’ के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से कई जीवन बचाए जा सकते हैं। उन्होंने आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने और ट्रॉमा केयर पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
सेमिनार में पद्मश्री हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) एससी मनचंदा ने यात्रियों को सलाह दी कि वे यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में धीरे-धीरे चढ़ाई करें। उन्होंने सुझाव दिया कि शुरुआती दिनों में कम ऊंचाई पर रुककर शरीर को अनुकूल होने का समय देना चाहिए। साथ ही योग और ध्यान को मानसिक संतुलन के लिए लाभकारी बताया।
मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के डॉ. पंकज ने पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम पर प्रकाश डालते हुए सुरक्षित ड्राइविंग और सतर्कता को जरूरी बताया। उन्होंने दुर्घटना के बाद प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की अहमियत पर भी विस्तार से जानकारी दी।
एम्स गोरखपुर के ऑर्थोपेडिक विभाग के एचओडी डॉ. आशुतोष तिवारी ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली न्यूरोलॉजिकल समस्याओं पर भी विस्तृत चर्चा की।
इस सेमिनार के जरिए न केवल यात्रियों को जागरूक करने का प्रयास किया गया, बल्कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सफल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी उठाया गया है।






