उत्तरकाशी: दयारा बुग्याल ट्रेक से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुई रामनगर निवासी बबीता पांडे की तलाश एक महीने बाद भी जारी है। पुलिस, वन विभाग, एसडीआरएफ और क्यूआरटी की संयुक्त टीम लगातार दुर्गम इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रही है। अब खोज अभियान को और व्यापक बनाते हुए नटीण के घने जंगलों और संभावित भालू आवासीय क्षेत्रों में विशेष तलाशी अभियान शुरू किया गया है।
बबीता पांडे 29 मई 2026 को दयारा बुग्याल क्षेत्र के गोई कैंप से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। घटना के बाद से पुलिस, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) और हेलीकॉप्टर की सहायता से बड़े स्तर पर खोज अभियान चलाया गया, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
जांच के दौरान पुलिस ने अपहरण की आशंका को भी ध्यान में रखते हुए दो युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। तकनीकी साक्ष्यों और विभिन्न पहलुओं पर जांच की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है। ऐसे में खोजी टीमें हर संभावित एंगल पर काम कर रही हैं।
मंगलवार 23 जून को अभियान का नेतृत्व कर रहे क्षेत्राधिकारी जनक सिंह पंवार और क्षेत्राधिकारी बड़कोट चंचल शर्मा के नेतृत्व में पुलिस, वन विभाग, एसडीआरएफ और क्यूआरटी की टीम दोबारा सर्च ऑपरेशन के लिए क्षेत्र में पहुंची। टीम ने दयारा ट्रेक के बाईं ओर स्थित नटीण के घने और दुर्गम जंगलों में विशेष अभियान चलाया।
इस दौरान संभावित भालू आवासीय क्षेत्रों की गहन तलाशी ली गई। साथ ही जंगल के भीतर बने पानी के टैंकों, प्राकृतिक जलस्रोतों और अन्य संदिग्ध स्थानों की भी बारीकी से जांच की गई। पहले से चिन्हित कुछ खुदे हुए स्थानों को दोबारा पानी डालकर खोदा गया, ताकि किसी भी संभावित साक्ष्य को नजरअंदाज न किया जा सके।
सीओ जनक सिंह पंवार ने बताया कि संबंधित क्षेत्र में पहले भी कई बार खोज अभियान चलाया गया है, लेकिन अब सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तलाशी अभियान को और अधिक व्यापक बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है, वहीं तकनीकी साक्ष्यों और जांच के अन्य पहलुओं पर भी समानांतर रूप से काम किया जा रहा है।
बबीता पांडे नैनीताल जिले के रामनगर की रहने वाली हैं और एमबीए की छात्रा हैं। वह अपने परिवार की सबसे बड़ी सदस्य हैं। परिवार में माता-पिता, दादी और दो छोटे भाई हर्षित पांडे तथा तनुज पांडे हैं, जो रामनगर में पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।
परिजनों के अनुसार, बबीता अपने दो साथियों के साथ उत्तरकाशी घूमने आई थी। हर्षिल के लामा टॉप और गंगोत्री धाम के दर्शन के बाद तीनों दयारा बुग्याल ट्रेक पर पहुंचे थे। 29 मई की रात वे गोई कैंप में रुके थे। बताया जाता है कि रात करीब 11 बजे बबीता टेंट से बाहर निकली थी, जिसके बाद वह रहस्यमय तरीके से लापता हो गई। तब से उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
गौरतलब है कि उत्तरकाशी जिले में समुद्र तल से लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल देश के सबसे खूबसूरत ट्रेकिंग स्थलों में गिना जाता है। सर्दियों में बर्फ से ढके मैदान और गर्मियों में हरे-भरे बुग्याल पर्यटकों और ट्रेकर्स को आकर्षित करते हैं। यहां से बंदरपूंछ, श्रीकंठ, द्रौपदी का डांडा और गंगोत्री पर्वतमाला के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं।
हालांकि इस प्राकृतिक सुंदरता के बीच बबीता पांडे के लापता होने की घटना अब भी एक रहस्य बनी हुई है। एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी परिजन उसकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि प्रशासन और बचाव एजेंसियां लगातार हर संभावित स्थान पर खोज अभियान चला रही हैं।






