हरिद्वार: नगर निगम हरिद्वार की बोर्ड बैठक सोमवार को टाउन हॉल में शुरू होते ही हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक की शुरुआत में मनोनीत पार्षदों को शपथ दिलाई गई, लेकिन इसके बाद जैसे ही बोर्ड बैठक की कार्यवाही आगे बढ़ी, कांग्रेस पार्षदों ने पिछले बोर्ड बैठकों में पारित प्रस्तावों पर कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध शुरू कर दिया। विरोध के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने पुराने प्रस्तावों की प्रतियां सदन में लहराईं और उन्हें जलाकर अपना आक्रोश जताया।
मनोनीत पार्षदों को दिलाई गई शपथ
टाउन हॉल में आयोजित बैठक में वरिष्ठ भाजपा नेता एवं मंत्री मदन कौशिक ने मनोनीत 12 पार्षदों को शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण कार्यक्रम में मेयर किरण जैसल और मुख्य नगर आयुक्त नंदन कुमार भी मौजूद रहे। शपथ ग्रहण के बाद मदन कौशिक बैठक स्थल से रवाना हो गए और इसके तुरंत बाद सदन का माहौल गरमा गया।
कांग्रेस पार्षदों ने लगाया भेदभाव का आरोप
कांग्रेस पार्षदों का आरोप था कि बोर्ड बैठकों में पारित प्रस्तावों को अमल में नहीं लाया जा रहा है। उनका कहना था कि पिछले डेढ़ वर्षों से जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव लंबित पड़े हैं और अधिकारियों की ओर से उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
विरोध जताने के लिए कांग्रेस पार्षद पुराने प्रस्तावों की प्रतियां लेकर सदन में पहुंचे और कार्रवाई न होने के विरोध में उन्हें जला दिया। इसके बाद सदन में जोरदार नारेबाजी और हंगामा शुरू हो गया।
भाजपा और कांग्रेस पार्षद आमने-सामने
बैठक के दौरान मनसा देवी रोपवे संचालन का मुद्दा भी चर्चा का केंद्र बन गया। रोपवे संचालन से जुड़े प्रस्ताव पर भाजपा और कांग्रेस के पार्षद आमने-सामने आ गए। दिलचस्प बात यह रही कि इस मुद्दे पर भाजपा के कुछ पार्षद भी कांग्रेस की मांगों का समर्थन करते नजर आए और अधिकारियों से जवाब मांगने लगे।
हंगामे के दौरान बंदरों की समस्या, आवारा पशु, सफाई व्यवस्था और विकास कार्यों जैसे मुद्दों पर भी पार्षदों ने अधिकारियों को घेरा।
रोपवे टेंडर को लेकर उठे सवाल
बैठक में मनसा देवी रोपवे के संचालन को लेकर भी तीखी बहस हुई। जानकारी के अनुसार, वर्तमान रोपवे संचालक कंपनी की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है। करीब एक वर्ष पहले प्रशासन ने नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन इसमें रोपवे संचालन के अनुभव वाली कंपनियों के साथ निर्माण कंपनियों को भी पात्रता देने पर विवाद खड़ा हो गया।
मामला अदालत तक पहुंच गया और अब नगर निगम बोर्ड की मंजूरी के बाद नई टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसी मुद्दे पर पार्षदों ने पारदर्शी और अनुभव आधारित टेंडर प्रक्रिया की मांग उठाई।
मेयर ने अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए सवाल
मेयर किरण जैसल ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्षों से जनता द्वारा चुने गए पार्षदों के कई कार्य लंबित हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता के काम होने चाहिए और अधिकारियों की मनमानी नहीं चलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि रोपवे संचालन का मामला नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ाया जाएगा।
अनुभव वाली कंपनियों को मौका देने की मांग
भाजपा पार्षद भूपेंद्र कुमार ने कहा कि रोपवे संचालन के लिए नई ओपन टेंडर प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए और इसमें केवल अनुभवी कंपनियों को शामिल किया जाना चाहिए।
वहीं भाजपा पार्षद अनुज सिंह ने कहा कि रोपवे संचालन जैसी तकनीकी सेवा का जिम्मा ऐसी कंपनी को मिलना चाहिए जिसके पास अनुभव हो और जो नगर निगम को अधिकतम राजस्व दे सके।
कांग्रेस पार्षद सुनील कुमार ने आरोप लगाया कि रोपवे संचालन के मामले में अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि कम से कम दस वर्ष के अनुभव वाली कंपनियों को ही टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
हंगामे के बीच बैठक स्थगित
लगातार बढ़ते हंगामे और पार्षदों के बीच तीखी बहस के चलते बैठक का संचालन मुश्किल हो गया। स्थिति को देखते हुए मेयर किरण जैसल ने बोर्ड बैठक को स्थगित करने की घोषणा कर दी।
मुख्य नगर आयुक्त नंदन कुमार ने कहा कि बोर्ड बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई, लेकिन हंगामे के कारण अंतिम निर्णय नहीं हो सका। रोपवे संचालन समेत अन्य सभी लंबित विषयों पर अगली बोर्ड बैठक में फिर से चर्चा की जाएगी और शासन के निर्धारित नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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