देहरादून: केदारनाथ यात्रा कॉरिडोर में कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने उत्तराखंड सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। सोनप्रयाग, गौरीकुंड और केदारनाथ धाम में सीवेज ट्रीटमेंट, शौचालय सुविधाओं और ठोस कचरे के प्रबंधन में कथित खामियों का मामला ट्रिब्यूनल के सामने उठाया गया है। NGT ने मामले को पर्यावरण मानकों के अनुपालन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
सीवेज और कचरा प्रबंधन पर उठे सवाल
NGT की मुख्य पीठ ने 6 अक्टूबर के आदेश में कहा कि नोएडा के पर्यावरण एवं आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता की ओर से दायर आवेदन में यात्रा कॉरिडोर की पर्यावरणीय व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए गए हैं।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि संबंधित क्षेत्र में नालों का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है, सीवर कनेक्टिविटी पर्याप्त नहीं है और शौचालयों से जुड़ा बुनियादी ढांचा भी ठीक नहीं है। इसके अलावा, गंदे पानी के अनुचित निस्तारण और ठोस कचरे के सही तरीके से प्रबंधन नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है।
केदारनाथ में 600 KLD क्षमता के STP पर सवाल
आवेदन में केदारनाथ धाम में स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता को लेकर भी चिंता जताई गई है। आवेदक के मुताबिक, यहां मौजूद 600 किलोलीटर प्रतिदिन (KLD) क्षमता वाला एसटीपी क्षेत्र से निकलने वाले सीवेज के उपचार के लिए पर्याप्त नहीं है।
आवेदन में दावा किया गया है कि केदारनाथ में सीवेज के समुचित उपचार के लिए कम से कम 1,000 KLD क्षमता वाले एसटीपी की जरूरत है। इसके साथ ही सीवेज और ठोस कचरे के निस्तारण के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है।
गौरीकुंड की ट्रीटमेंट क्षमता पर भी उठे सवाल
आवेदक ने गौरीकुंड में मौजूद 200 KLD क्षमता वाली ट्रीटमेंट सुविधा को भी क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले सीवेज की मात्रा के लिहाज से अपर्याप्त बताया है। आवेदन में सोनप्रयाग, गौरीकुंड और केदारनाथ से निकलने वाले सीवेज तथा ठोस कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
हालांकि, ये सभी आरोप आवेदन में उठाए गए मुद्दे हैं। इन पर संबंधित पक्षों का जवाब और मामले में आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।
17 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
NGT के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर अफरोज अहमद की पीठ ने माना कि आवेदन पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा उठाता है। इसी आधार पर संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है।
ट्रिब्यूनल ने आवेदक को अगली सुनवाई की तारीख से कम से कम एक सप्ताह पहले प्रतिवादियों को आवेदन की प्रति उपलब्ध कराने और इसकी पुष्टि में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश भी दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को निर्धारित की गई है। अब संबंधित पक्षों के जवाब के बाद स्पष्ट होगा कि यात्रा कॉरिडोर में सीवेज ट्रीटमेंट, स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़े आरोपों पर क्या तथ्य सामने आते हैं।







