रुद्रप्रयाग:
केदारनाथ धाम में इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे व्यवस्थाओं को बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे हालात में जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग द्वारा लागू की गई टोकन व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए राहत और सुव्यवस्था का मजबूत माध्यम बनकर उभरी है।
यात्रा को सुरक्षित, सरल और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 21 अप्रैल से टोकन सिस्टम लागू किया गया है। इस व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं को निर्धारित समयानुसार बाबा केदारनाथ के गर्भगृह में प्रवेश दिया जा रहा है, जिससे भीड़ पर प्रभावी नियंत्रण बना हुआ है। श्रद्धालु अब शांतिपूर्वक और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कर पा रहे हैं।
मंदिर परिसर में भीड़ प्रबंधन को और बेहतर बनाने के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग द्वार निर्धारित किए गए हैं। इससे आवाजाही नियंत्रित और सुरक्षित बनी हुई है। पुलिस, प्रशासन और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के बीच बेहतर समन्वय के चलते यात्रा मार्ग से लेकर धाम परिसर तक सुरक्षा, मार्गदर्शन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2026 को विधि-विधान के साथ केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे। कपाट खुलने के पहले ही दिन करीब 38 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा केदारनाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया, जो इस वर्ष भारी भीड़ का स्पष्ट संकेत है। पुलिस उपाधीक्षक विकास पुंडीर ने बताया कि शुरुआती चरण में ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंच रहे हैं। ऐसे में सभी को टोकन के अनुसार कतारबद्ध तरीके से दर्शन कराए जा रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील भी की है।
एसडीआरएफ का त्वरित रेस्क्यू:
केदारनाथ में तैनात एसडीआरएफ टीम ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मुस्तैदी का परिचय दिया है। दो अलग-अलग घटनाओं में बीमार यात्रियों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
पहली घटना में विवेकानंद अस्पताल में भर्ती 55 वर्षीय धनजी भाई (निवासी गुजरात), जो सांस लेने में गंभीर तकलीफ से जूझ रहे थे, को एसडीआरएफ टीम ने उप निरीक्षक राजबर राणा के नेतृत्व में तत्काल हेलीपैड तक पहुंचाया, जहां से उन्हें एयरलिफ्ट कर उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए भेजा गया।
वहीं दूसरी घटना में आगरा भवन में ठहरी 37 वर्षीय आकांक्षा (निवासी जयपुर) का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ने पर एसडीआरएफ टीम ने मुख्य आरक्षी जितेंद्र नेगी के नेतृत्व में मौके पर पहुंचकर उनका सफल रेस्क्यू किया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेस कैंप अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
कुल मिलाकर, प्रशासन और राहत एजेंसियों के बेहतर समन्वय से केदारनाथ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के प्रयास लगातार जारी हैं।







