रामनगर: अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लॉक के कॉर्बेट से सटे तड़म गांव में पिछले डेढ़ महीने से दहशत का कारण बने संदिग्ध बाघ को आखिरकार वन विभाग और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन की टीम ने ट्रेंकुलाइज कर लिया है. बाघ को उसी क्षेत्र से पकड़ा गया है, जहां हाल ही में दूसरी घटना हुई थी. अब वन विभाग इस बात की पुष्टि करने में जुटा है कि यही बाघ दोनों ग्रामीणों की मौत के लिए जिम्मेदार था या नहीं. इसके लिए बाघ के डीएनए सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं.
जानकारी के अनुसार 31 मार्च 2026 को तड़म गांव निवासी 60 वर्षीय खीम सिंह जंगल में लकड़ी लेने गए थे, जहां बाघ ने उन पर हमला कर दिया था. इस हमले में उनकी मौत हो गई थी. घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया था. इसके बाद 3 मई को गांव के ही 55 वर्षीय महिपाल सिंह पर भी बाघ ने हमला कर दिया. महिपाल सिंह घास लेकर घर लौट रहे थे और घर से कुछ दूरी पर ही बाघ ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.
लगातार दो ग्रामीणों की मौत के बाद गांव में भारी आक्रोश फैल गया था. ग्रामीणों की सुरक्षा और विरोध को देखते हुए वन विभाग ने मोहान सफारी पर्यटन जोन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था. इसके साथ ही वन विभाग और कॉर्बेट प्रशासन की टीमें लगातार इलाके में सर्च अभियान चला रही थीं.
डॉ. दुष्यंत शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि देर रात टीम ने तड़म गांव में अंतिम घटना स्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर जंगल में बाघ को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया. उन्होंने बताया कि पकड़ा गया बाघ नर है और उसकी उम्र करीब 2 से ढाई वर्ष के बीच है. फिलहाल बाघ पूरी तरह स्वस्थ दिखाई दे रहा है.
डॉ. शर्मा ने बताया कि अब बाघ के डीएनए सैंपल जांच के लिए वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की लैब भेजे जा रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दोनों घटनाओं के पीछे यही बाघ जिम्मेदार था या नहीं. इसके अलावा बाघ के ब्लड सैंपल और अन्य स्वास्थ्य जांचें ढेला रेस्क्यू सेंटर में की जाएंगी.
बता दें कि तड़म गांव में बाघ की दहशत के चलते स्कूल भी बंद कर दिए गए थे और ग्रामीण भय के माहौल में जी रहे थे. अब बाघ के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने कुछ राहत की सांस ली है, हालांकि डीएनए जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी.







