खटीमा: सुरई वन रेंज में बाघ के हमले में मारे गए बुजुर्ग शेर सिंह कन्याल की मौत के बाद इलाके में दहशत और शोक का माहौल है। परिजनों के अनुसार, शेर सिंह कन्याल रोज की तरह रविवार को भी अपने मवेशियों को जंगल चराने ले गए थे। शाम के समय मवेशी तो घर लौट आए, लेकिन जब बुजुर्ग वापस नहीं आए तो परिजनों और ग्रामीणों को चिंता हुई।
इसके बाद ग्रामीणों ने जंगल में खोजबीन शुरू की। अंधेरा होने के कारण ट्रैक्टर की मदद से तलाश की गई। खोज के दौरान कुछ दूरी पर बुजुर्ग की जैकेट पड़ी मिली और जमीन पर घसीटने के निशान भी दिखाई दिए। जब इन निशानों का पीछा किया गया तो आगे जाकर शेर सिंह कन्याल का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि घटनास्थल के आसपास उन्होंने दो बाघ भी देखे थे, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल और बढ़ गया।
घटना के बाद वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। सुरई वन रेंज के रेंजर राजेंद्र सिंह मनराल ने बताया कि बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए घटनास्थल के आसपास ट्रैप कैमरे लगा दिए गए हैं। इसके साथ ही वनों से सटे ग्रामीण इलाकों में वन कर्मियों की गश्त बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि फिलहाल जंगल की ओर न जाएं। उन्होंने बताया कि घटनास्थल पर पिंजरा लगाने को लेकर उच्च अधिकारियों से निर्देश लिए जा रहे हैं और मृतक के परिजनों को वन अधिनियम के तहत मुआवजा दिए जाने की कार्रवाई भी जारी है।
वहीं, खटीमा विधायक भुवन कापड़ी ने मानव–वन्यजीव संघर्ष पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने मांग की है कि वन क्षेत्र से लगे गांवों की सीमा से एक किलोमीटर के भीतर फेंसिंग की व्यवस्था की जाए, ताकि जंगली जानवर गांवों में प्रवेश न कर सकें और ग्रामीण बिना भय के अपने मवेशियों के लिए चारा-पानी की व्यवस्था कर सकें। विधायक ने वन विभाग से मृतक शेर सिंह कन्याल के परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और मानव–वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए त्वरित व प्रभावी कदम उठाने की भी मांग की है।







