पर्यटन सीजन में प्यासा मसूरी: पेयजल संकट पर भड़के व्यापारी और होटल कारोबारी, तीन दिन में समाधान नहीं तो आंदोलन की चेतावनी

मसूरी: पर्यटन सीजन अपने चरम पर है, लेकिन पहाड़ों की रानी मसूरी एक बार फिर गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है। शहर के कई इलाकों में पानी की आपूर्ति बाधित होने से होटल व्यवसायी, होमस्टे संचालक, व्यापारी और स्थानीय लोग परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि करोड़ों रुपये की यमुना पंपिंग पेयजल योजना की उपयोगिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

सोमवार को मसूरी होटल एसोसिएशन, मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन तथा मसूरी होमस्टे संगठन के पदाधिकारियों ने एसडीएम कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मसूरी विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को ज्ञापन भेजकर तत्काल समाधान की मांग की। इसके बाद संगठनों के प्रतिनिधियों ने गढ़वाल जल संस्थान कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

पर्यटन सीजन में पानी की किल्लत से बढ़ी परेशानी

होटल व्यवसायियों का कहना है कि इन दिनों मसूरी में पर्यटकों की भारी भीड़ है, लेकिन पानी की आपूर्ति सामान्य दिनों की तुलना में भी कम हो रही है। कई क्षेत्रों में नलों में पर्याप्त प्रेशर तक नहीं पहुंच रहा है, जिससे होटल, रेस्तरां और स्थानीय परिवारों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

मसूरी होटल एसोसिएशन के सचिव अजय भार्गव ने कहा कि शहर की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए करीब 144 करोड़ रुपये की लागत से यमुना पंपिंग पेयजल योजना शुरू की गई थी। उस समय दावा किया गया था कि वर्ष 2054 तक मसूरी में पानी की कमी नहीं होगी, लेकिन मौजूदा हालात इन दावों के विपरीत नजर आ रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि जल निगम और जल संस्थान के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम जनता और पर्यटन उद्योग को भुगतना पड़ रहा है। एक विभाग दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहा है, जबकि लोग मूलभूत सुविधा के लिए परेशान हैं।

पर्यटकों को सुविधाओं के बजाय मिल रही समस्याएं

अजय भार्गव ने कहा कि यदि पर्यटक मसूरी घूमने आएं और उन्हें होटल में पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी न मिले तो इसका सीधा असर शहर की छवि और पर्यटन कारोबार पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पर्यटकों को पानी की कमी, ट्रैफिक जाम और चालान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे पर्यटन उद्योग प्रभावित हो रहा है।

शिव मंदिरों में जल चढ़ाने तक का संकट

मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि शहर में पेयजल संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई शिव मंदिरों में भगवान शिव को अर्पित करने के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने कहा कि 144 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना के बावजूद यदि शहर पानी के लिए तरस रहा है तो यह संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जल निगम और जल संस्थान के बीच तालमेल की कमी के कारण योजना का पूरा लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है।

टैंकरों के कारण बढ़ रहा ट्रैफिक दबाव

मसूरी होमस्टे संगठन के अध्यक्ष देवी दयाल ने बताया कि पानी की कमी के चलते होटल और होमस्टे संचालकों को निजी टैंकरों पर निर्भर होना पड़ रहा है। उनके अनुसार प्रतिदिन 100 से 120 पानी के टैंकर शहर में पहुंच रहे हैं, जिससे पहले से ही दबाव झेल रही यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और जाम की समस्या बढ़ती जा रही है।

तीन दिन में समाधान नहीं तो उग्र आंदोलन

रजत अग्रवाल ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिनों के भीतर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था सुचारु नहीं की गई तो व्यापारी और सामाजिक संगठन उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि गढ़वाल जल संस्थान कार्यालय में तालाबंदी की जाएगी और मसूरी से मुख्यमंत्री आवास तक पैदल मार्च निकालकर सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया जाएगा।

जल संस्थान ने बताई तकनीकी बाधाएं

गढ़वाल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अमित कुमार ने बताया कि हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण कई पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इसके अलावा यमुना पंपिंग पेयजल योजना के दूसरे चरण में पानी लिफ्ट करने वाली मशीन में तकनीकी खराबी आने से भी आपूर्ति प्रभावित हुई।

उन्होंने कहा कि अधिकांश तकनीकी समस्याओं को दूर कर लिया गया है और देर शाम तक सभी क्षेत्रों में जलापूर्ति सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही वितरण व्यवस्था को लेकर मिल रही शिकायतों का स्थलीय निरीक्षण भी किया जाएगा।

अधिशासी अभियंता के अनुसार मसूरी में प्रतिदिन लगभग 14 एमएलडी पानी की मांग है, जबकि वर्तमान में 14 से 15 एमएलडी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। उनके मुताबिक पानी की उपलब्धता पर्याप्त है, लेकिन वितरण व्यवस्था और तकनीकी बाधाओं के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पर्यटन सीजन के बीच मसूरी में गहराता पेयजल संकट अब प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो यह मुद्दा बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

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