मसूरी: पर्यटन नगरी मसूरी में लगातार बढ़ती ट्रैफिक समस्या को देखते हुए नगर पालिका अब सख्त फैसलों की ओर बढ़ गई है। नगर पालिका सभागार में पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने को लेकर विस्तृत मंथन किया गया।
वन-वे ट्रैफिक सिस्टम का प्रस्ताव
बैठक में मसूरी के प्रमुख मार्गों—घंटाघर, मलिंगार, सिविल रोड, पालिका रोड और लाइब्रेरी क्षेत्र—को चरणबद्ध तरीके से वन-वे ट्रैफिक सिस्टम में बदलने का प्रस्ताव रखा गया।
सभासद अमित भट्ट ने पर्यटन समिति द्वारा तैयार प्लान का प्रस्तुतीकरण करते हुए कहा कि इससे जाम की समस्या में काफी कमी आएगी।
माल रोड पर शाम 5 बजे के बाद नो-व्हीकल जोन
बैठक में सबसे अहम फैसला माल रोड को लेकर लिया गया। तय किया गया कि शाम 5 बजे के बाद माल रोड पर सामान्य वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
केवल आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को अनुमति होगी। वहीं स्थानीय निवासियों, स्कूली बच्चों और ऑफिस जाने वालों को शाम 6 बजे तक सीमित छूट दी जाएगी।
स्थानीय लोगों को अपने घर तक पहुंचने के लिए एक बार प्रवेश की अनुमति दी जाएगी, जिसके लिए विशेष पास जारी किए जाएंगे।
डिलीवरी टाइमिंग में भी बदलाव
शहर में जाम को कम करने के लिए सामान वितरण का समय भी तय किया गया है।
अब सामान्य डिस्ट्रीब्यूटर्स दोपहर 12 से 3 बजे तक ही डिलीवरी कर सकेंगे, जबकि दूध, गैस और ड्राई क्लीनिंग जैसी आवश्यक सेवाओं को सुबह के समय अनुमति दी जाएगी।
अवैध पार्किंग पर सख्ती
पालिकाध्यक्ष ने साफ किया कि माल रोड पर अवैध पार्किंग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी होटल द्वारा वाहन खड़े कराए जाते हैं, तो भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
व्यवस्था लागू करने के लिए विशेष तैनाती
नई ट्रैफिक व्यवस्था लागू करने के लिए नगर पालिका 20 से 25 कर्मचारियों को दो महीने के लिए विशेष रूप से तैनात करेगी। साथ ही इस योजना को पुलिस और यातायात विभाग के साथ साझा कर अंतिम रूप दिया जाएगा।
लोगों से सहयोग की अपील
मीरा सकलानी ने कहा कि मसूरी को सुंदर और व्यवस्थित बनाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में कुछ असुविधा हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह व्यवस्था शहर और पर्यटन दोनों के लिए लाभकारी साबित होगी।
नगर पालिका की यह पहल मसूरी में बढ़ते पर्यटन दबाव और स्थानीय समस्याओं के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अब देखना होगा कि यह नई व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।






