देहरादून/पिथौरागढ़: चीन सीमा से सटे पवित्र तीर्थ आदि कैलाश और ॐ पर्वत की यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि मौसम अनुकूल रहा, तो इस वर्ष आदि कैलाश यात्रा 1 मई से शुरू कर दी जाएगी। इसके साथ ही इनर लाइन परमिट (ILP) भी 1 मई से जारी किए जाएंगे, जिससे श्रद्धालु इस धार्मिक यात्रा में शामिल हो सकेंगे।
तैयारियों को लेकर प्रशासन सक्रिय
यात्रा को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए धारचूला क्षेत्र में एसडीएम आशीष जोशी ने विभिन्न विभागों, टैक्सी यूनियन और होम स्टे संचालकों के साथ बैठक की। बैठक में यात्रा मार्ग को दुरुस्त करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को मांगती नाला, एलागाड़, कूलागाड़, नजंग और प्यलसीती जैसे संवेदनशील स्थानों पर सड़क की मरम्मत और गड्ढे भरने के निर्देश दिए गए हैं।
पेयजल और सड़क सुविधाओं पर विशेष ध्यान
ग्राम गुंजी में पेयजल समस्या को देखते हुए सड़क निर्माण कंपनी को यात्रा अवधि के दौरान रोजाना पानी के टैंकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, पेयजल निगम को पंपिंग योजनाओं को जल्द सुचारु करने और बीआरओ को संवेदनशील मार्गों को हर परिस्थिति में चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थानीय लोगों को राहत, परमिट प्रक्रिया सरल
टैक्सी यूनियन और स्थानीय लोगों ने मांग रखी कि पिछले साल की तरह इस बार भी धारचूला तहसील के निवासियों को आधार कार्ड के आधार पर यात्रा की अनुमति दी जाए। इस पर प्रशासन ने सहमति जताई है। साथ ही ओल्ड लिपुपास से कैलाश दर्शन की अनुमति के प्रस्ताव पर उच्च स्तर पर विचार किया जाएगा।
फर्जी परमिट पर सख्ती
पिछले साल सामने आए फर्जी परमिट के मामलों को देखते हुए प्रशासन ने इस बार सख्त रुख अपनाया है। सभी सीएससी सेंटर संचालकों को चेतावनी दी गई है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यात्रा व्यवस्थाओं पर फोकस
बैठक में रुकने की सुविधा, परिवहन, सुरक्षा, साफ-सफाई और यात्रियों के साथ व्यवहार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। होम स्टे संचालकों और टूर ऑपरेटरों से अपील की गई है कि वे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएं। गैस संकट को देखते हुए वैकल्पिक संसाधनों के उपयोग की भी सलाह दी गई है।
कैसे पहुंचे आदि कैलाश?
आदि कैलाश पहुंचने के लिए काठगोदाम (रेल) या पंतनगर/नैनी सैनी (हवाई) से पिथौरागढ़ तक पहुंचना होता है। इसके बाद सड़क मार्ग से धारचूला, गुंजी और कुटी गांव होते हुए यात्रा आगे बढ़ती है। अंतिम चरण में हल्का ट्रेक भी करना पड़ सकता है।
यात्रा से पहले जान लें जरूरी बातें
- इनर लाइन परमिट अनिवार्य है
- मई-जून यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त समय
- मानसून और सर्दियों में रास्ता जोखिम भरा
- नेटवर्क सीमित, स्वास्थ्य का विशेष ध्यान जरूरी
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
आदि कैलाश यात्रा से स्थानीय लोगों, टैक्सी संचालकों, होम स्टे व्यवसायियों और छोटे व्यापारियों को सीधा लाभ मिलता है। प्रशासन का मानना है कि बेहतर प्रबंधन से इस बार यात्रा और भी सुगम और सुरक्षित होगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर, प्रशासन की तैयारियों और सख्ती के बीच इस बार आदि कैलाश यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। अब सभी की नजर मौसम और अंतिम व्यवस्थाओं पर टिकी है।






