देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित आपत्तिजनक ऑडियो-वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट मामले में गिरफ्तार किए गए पूर्व विधायक सुरेश राठौर को अदालत से बड़ी राहत मिली है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) रवि प्रकाश की अदालत ने सुरेश राठौर की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें एक लाख रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
14 जून को हुई थी गिरफ्तारी
जानकारी के अनुसार कोतवाली डालनवाला में सुरेश राठौर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने 14 जून 2026 को मामले में बीएनएस की धारा 308(6) भी जोड़ते हुए उन्हें हिरासत में लिया था। पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।
अदालत में बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि सुरेश राठौर जांच में लगातार सहयोग कर रहे थे। उन्हें पहले बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत नोटिस देकर छोड़ा भी गया था। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मामले में लगाई गई अधिकांश धाराएं जमानती प्रकृति की हैं।
वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामले की विवेचना अभी जारी है और आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसलिए उन्हें राहत नहीं दी जानी चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पुलिस अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पाया कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को जमानत दी जा सकती है।
अदालत ने कहा- जांच में सहयोग कर रहे थे आरोपी
सीजेएम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सुरेश राठौर पहले से जांच में सहयोग कर रहे थे और मामले में जो अतिरिक्त धारा जोड़ी गई है, वह भी जमानती प्रकृति की है। इसी आधार पर अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए रिहाई के आदेश जारी किए।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कुछ कथित ऑडियो-वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आया था। आरोप है कि पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित पत्नी एवं अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर ऐसे ऑडियो-वीडियो साझा किए थे, जिनमें कुछ भाजपा नेताओं के बारे में आपत्तिजनक और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाले दावे किए गए थे।
इन ऑडियो-वीडियो में कथित तौर पर एक ‘वीआईपी’ का भी जिक्र किया गया था, जिसके बाद प्रदेशभर में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई। अंकिता भंडारी हत्याकांड, जो लंबे समय से सुर्खियों से दूर हो गया था, एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया।
प्रदेशभर में हुआ था विरोध प्रदर्शन
ऑडियो-वीडियो वायरल होने के बाद प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला।
मामले के बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी के परिजनों से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति करने की घोषणा भी की थी।
भाजपा प्रदेश प्रभारी की शिकायत पर दर्ज हुए मुकदमे
भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने 5 जनवरी को कोतवाली डालनवाला में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सोशल मीडिया पर प्रसारित ऑडियो-वीडियो के माध्यम से उन्हें और भाजपा के अन्य नेताओं को जानबूझकर बदनाम करने तथा झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है।
इसी शिकायत के आधार पर देहरादून और हरिद्वार के विभिन्न थानों में सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
यह मामला नैनीताल हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है। हाल ही में हाईकोर्ट ने सुरेश राठौर के खिलाफ दर्ज चार एफआईआर में से दो को रद्द कर दिया था, जबकि दो मामलों में जांच जारी रखने की अनुमति दी थी। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई इन्हीं मामलों से संबंधित बताई जा रही है।
भाजपा पहले ही कर चुकी है निष्कासित
सुरेश राठौर पहले भाजपा के विधायक रह चुके हैं, लेकिन पार्टी उन्हें पहले ही निष्कासित कर चुकी है। वे समय-समय पर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। उर्मिला सनावर के साथ उनके कथित ऑडियो-वीडियो सामने आने के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई थी।
फिलहाल अदालत से जमानत मिलने के बाद सुरेश राठौर को बड़ी राहत मिली है, जबकि मामले की जांच अभी भी जारी है और आगे की कार्रवाई विवेचना के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।






