मसूरी: भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर मसूरी के अंबेडकर चौक में भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा भव्य छात्रवृत्ति एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रतिभाशाली छात्रों और समाजसेवियों को मिला सम्मान
इस अवसर पर मंत्री गणेश जोशी और राज्य मंत्री भगवत सिंह मकवाना ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले छात्र-छात्राओं को “राधेश्याम सोनकर स्मृति सम्मान” और छात्रवृत्ति प्रदान की। वहीं, पर्यावरण मित्रों को “शकुन्तला देवी स्मृति सम्मान” से नवाजा गया।
इसके साथ ही समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विमल रावत, नीता कुकरेती, एमएस अंसारी, डॉ. खजान सिंह चौहान, लोक गायिका डॉ. रेशमा शाह, डॉ. प्रेशिता रावत, पत्रकार बिजेंद्र पुंडीर और सूरत सिंह रावत को “बाबा भीमराव अंबेडकर फेलोशिप अवार्ड” से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को भावनात्मक और उत्साहपूर्ण बना दिया।
अंबेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक—मंत्री
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पकार थे, जिन्होंने देश को मजबूत और न्यायपूर्ण ढांचा दिया।
उन्होंने सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के खिलाफ उनके संघर्ष को याद करते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से उन्होंने कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने का मार्ग दिखाया।
मंत्री ने अकादमी के अध्यक्ष सुनील सोनकर को इस आयोजन और अपने माता-पिता की स्मृति में छात्रवृत्ति देने की पहल के लिए बधाई दी और इसे युवाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
रामनगर में निकली भव्य शोभायात्रा
वहीं, रामनगर में अंबेडकर जयंती के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बैंड-बाजों और जयघोषों के साथ निकली इस यात्रा ने पूरे शहर को बाबा साहेब के रंग में रंग दिया। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों—कांग्रेस और भाजपा सहित—ने कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
खटीमा में झांकियों से गूंजा शहर
खटीमा में भी बाबा साहेब की 135वीं जयंती बड़े उत्साह के साथ मनाई गई। हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और भव्य झांकियों के माध्यम से डॉ. अंबेडकर के जीवन और विचारों को प्रस्तुत किया गया। इस दौरान सामाजिक समरसता, समानता और एकता के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया।
अंबेडकर जयंती के इन आयोजनों ने एक बार फिर समाज को समानता, शिक्षा और न्याय के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।







