देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देहरादून दौरे के दौरान आयोजित भव्य जनसभा में जहां हजारों की भीड़ और मंच पर दिग्गज नेताओं की मौजूदगी रही, वहीं एक तस्वीर ने सियासी हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया। गदरपुर से भाजपा विधायक अरविंद पांडेय इस कार्यक्रम में अन्य विधायकों और पार्टी नेताओं से अलग बैठे नजर आए, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा।
अलग बैठने पर उठे सवाल
जनसभा स्थल पर विधायकों, दायित्वधारियों और कार्यकर्ताओं के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था की गई थी, जहां अधिकतर भाजपा विधायक एक साथ बैठे दिखे। लेकिन अरविंद पांडेय मीडिया गैलरी में अकेले बैठे नजर आए। उनके इस कदम ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
नाराजगी की चर्चाएं फिर तेज
बीते कुछ समय से अरविंद पांडेय की कथित नाराजगी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। माना जा रहा है कि कुछ महीने पहले उनके परिजनों पर लगे अतिक्रमण के आरोप और प्रशासन द्वारा जारी नोटिस के बाद से वे असंतुष्ट चल रहे हैं। इसके बाद से वह कई सरकारी और पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए नजर आए हैं।
खुद दी सफाई—‘मेरी अपनी मर्जी’
हालांकि, इस पूरे मामले पर अरविंद पांडेय ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि उनका अलग बैठना पूरी तरह उनकी व्यक्तिगत इच्छा थी। उन्होंने कहा कि भाजपा का कोई भी कार्यकर्ता या नेता आगे बैठने के लिए काम नहीं करता और उन्होंने व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्वेच्छा से पीछे बैठने का निर्णय लिया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रोटोकॉल के तहत उन्हें आगे बैठने का स्थान दिया गया था, लेकिन उन्होंने खुद ही पीछे बैठना उचित समझा।
बीच में मिलने पहुंचे पार्टी पदाधिकारी
कार्यक्रम के दौरान भाजपा के प्रदेश महामंत्री अजय कुमार कुछ देर के लिए अरविंद पांडेय के पास पहुंचे और उनके साथ बैठे, लेकिन बाद में वह भी आगे की गैलरी में चले गए।
सीएम की बैठक से भी रहे थे अनुपस्थित
गौरतलब है कि 10 अप्रैल को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आयोजित विधानसभा वार समीक्षा बैठक में भी अरविंद पांडेय शामिल नहीं हुए थे, जबकि अन्य सभी विधायक मौजूद थे। उस समय भी उनकी नाराजगी को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।
अब पीएम मोदी की रैली में उनका इस तरह अलग बैठना एक बार फिर चर्चाओं को हवा दे रहा है। हालांकि, पांडेय इसे निजी निर्णय बता रहे हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर सवाल अभी भी बरकरार हैं।






