हरिद्वार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मदरसा शिक्षा को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य में वर्षों से संचालित मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया गया है। अब उत्तराखंड के सभी मदरसों में जुलाई 2026 से उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जो मदरसे इस पाठ्यक्रम को लागू नहीं करेंगे, उन्हें बंद कर दिया जाएगा।
सीएम धामी उत्तरी हरिद्वार स्थित अखंड परमधाम आश्रम में आयोजित युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरी के 71वें संन्यास जयंती महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत आश्रम में बनने वाले नए घाट का शिलान्यास भी किया।
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य सभी बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि अब मदरसों में केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि विज्ञान, गणित और भूगोल जैसे विषयों को भी अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा, ताकि बच्चों का समग्र विकास हो सके।
चारधाम यात्रा को लेकर सीएम ने बताया कि चारधाम यात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। सरकार ने पिछले अनुभवों के आधार पर व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया है, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिल सके।
महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले दलों ने महिलाओं के अधिकारों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों को नुकसान पहुंचाया है।
वहीं, मदरसा बोर्ड को भंग करने के फैसले का संत समाज ने स्वागत किया है। स्वामी कैलाशानंद गिरि ने इसे देवभूमि के हित में बताया, जबकि स्वामी चिदानंद मुनि महाराज ने कहा कि इस निर्णय से सभी बच्चों को समान शिक्षा का अधिकार मिलेगा।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है। अब राज्य के मदरसा संचालकों को इस प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी और शिक्षा बोर्ड से संबद्धता प्राप्त करनी होगी।
सरकार का कहना है कि इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता आएगी और सभी वर्गों के बच्चों को समान अवसर मिल सकेगा।






