देहरादून: उत्तराखंड में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है. कुंभ मेला समय पर और भव्य रूप से संपन्न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कुंभ मेले से जुड़ी सभी तैयारियां 31 अक्टूबर तक हर हाल में पूरी कर ली जाएं.
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कुंभ मेले की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सभी निर्माण कार्य तय समयसीमा के भीतर पूर्ण किए जाएं और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए. उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि शासन स्तर पर कुंभ से संबंधित कोई भी कार्य या फाइल लंबित नहीं रहनी चाहिए. यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी. सीएम ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता कुंभ मेले का भव्य, दिव्य और सुरक्षित आयोजन सुनिश्चित करना है.
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सचिव लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि अगले 24 घंटे के भीतर कुंभ मेले के लिए तकनीकी पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति की जाए. साथ ही कुंभ क्षेत्र में बने सभी पुलों का सुरक्षा ऑडिट कराने और सभी घाटों के सौंदर्यीकरण व आवश्यकतानुसार पुनर्निर्माण कार्य करने के निर्देश भी दिए गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि हर की पैड़ी के साथ-साथ अन्य सभी घाटों पर भी श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित स्नान की समुचित व्यवस्था की जाए.
मुख्यमंत्री धामी ने मेला क्षेत्र की स्वच्छता को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी प्रमुख स्थलों पर पर्याप्त संख्या में शौचालय और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था होनी चाहिए. सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बलों, जल पुलिस की तैनाती और ड्रोन, सीसीटीवी कैमरों व अन्य आधुनिक तकनीकी उपकरणों के उपयोग पर विशेष जोर दिया.
सीएम ने कहा कि कुंभ मेला क्षेत्र में कानून व्यवस्था, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन को लेकर अलग से विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाए. विभिन्न अखाड़ों को भूमि आवंटन का कार्य तय समय पर पूरा किया जाए और इसकी नियमित निगरानी मेला अधिकारी द्वारा की जाए. उन्होंने अखाड़ों, मठों, संत समाज, धार्मिक संस्थाओं, समितियों और स्थानीय लोगों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर उनके सुझावों के अनुसार मेले की तैयारियां करने के निर्देश दिए.
श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने कुंभ क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए. साथ ही वन से संबंधित मामलों में आवश्यक अनुमतियां शीघ्र प्राप्त करने को कहा. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अन्य राज्यों के साथ भी समन्वय स्थापित करने के निर्देश देते हुए कहा कि कुंभ से जुड़े सभी विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए.
मुख्यमंत्री ने आवास, टेंट सिटी की तैयारियां समय से पूरी करने, मेला क्षेत्र में अस्थायी अस्पताल, एंबुलेंस और मोबाइल मेडिकल टीम की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए. उन्होंने कहा कि कुंभ मेला हमारी संस्कृति और आस्था से जुड़ा एक विराट धार्मिक आयोजन है. करोड़ों श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होते हैं, इसलिए यह हम सभी का दायित्व है कि राज्य में आने वाला हर श्रद्धालु यहां से एक सुखद और सकारात्मक अनुभव लेकर जाए.
बैठक के बाद सचिव मुख्यमंत्री विनय शंकर पांडेय ने बताया कि कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर पिछले 6–7 महीनों से लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं. इसी क्रम में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आज की बैठक आयोजित की गई, जिसमें मेला अधिकारी द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रस्तुति दी गई. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कुंभ से जुड़े सभी कार्यों में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए.
उन्होंने बताया कि कुंभ मेले के कार्यों की थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन के लिए तीन संस्थानों को नामित किया गया है, जिनमें आईआईटी रुड़की भी शामिल है. साथ ही मेला क्षेत्र में आने वाले सभी पुलों का सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि समय रहते आवश्यक सुधार कार्य किए जा सकें. मुख्यमंत्री ने 31 अक्टूबर से पहले सभी कार्य पूरे करने और आगामी बैठक में विशेष रूप से ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए हैं.







