रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में पिछले कई दिनों से चर्चा का विषय बने नगरासू गुरुद्वारा विवाद का आखिरकार शांतिपूर्ण समाधान निकल आया है। गुरुद्वारे की छत पर डटे पांचों निहंग सिख मंगलवार को बातचीत के बाद नीचे उतर आए। इसके साथ ही कई दिनों से जारी गतिरोध समाप्त हो गया और पुलिस-प्रशासन ने राहत की सांस ली।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को पंजाब से निहंग सिखों का एक प्रतिनिधिमंडल नगरासू गुरुद्वारा पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने गुरुद्वारे की छत पर मौजूद निहंग सिखों से लंबी बातचीत की। बातचीत सफल रहने के बाद सभी निहंग सिख स्वेच्छा से नीचे उतरने को तैयार हो गए। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
20 जून से शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, 20 जून की शाम को निहंग सिखों का एक दल नगरासू गुरुद्वारे पहुंचा था। वहां किसी बात को लेकर हंगामा शुरू हो गया था। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को मौके पर बुलाया गया। पुलिस के पहुंचते ही हंगामा कर रहे निहंग सिख गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए थे। इस दौरान उन्होंने गुरुद्वारे के दो सेवादारों को कुछ समय के लिए बंधक भी बना लिया था। हालांकि बाद में दोनों सेवादारों को छोड़ दिया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुद्वारे के बाहर स्थानीय पुलिस के साथ-साथ आईटीबीपी के जवानों की भी तैनाती कर दी गई थी। प्रशासन लगातार निहंग सिखों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास कर रहा था।
धीरे-धीरे कम हुई संख्या
प्रशासन के समझाने पर पहले दो निहंग सिख नीचे उतर आए थे और उन्होंने रुद्रप्रयाग प्रशासन से माफी मांगते हुए घर लौटने की इच्छा जताई थी। प्रशासन ने उन्हें वापस भेज दिया था। इसके बाद सोमवार को दो अन्य निहंग सिख भोजन लेने के लिए नीचे आए, जिनमें से एक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। इसके बाद गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर पांच निहंग सिख मौजूद थे।
मंगलवार को पंजाब से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल की मध्यस्थता के बाद शेष पांचों निहंग सिख भी नीचे उतर आए, जिससे लंबे समय से बना तनाव समाप्त हो गया।
कर्णप्रयाग विवाद से जुड़ा बताया जा रहा मामला
बताया जा रहा है कि नगरासू गुरुद्वारे में डटे निहंग सिख कर्णप्रयाग में 16 जून को हुए विवाद से नाराज थे। जानकारी के मुताबिक, हेमकुंड साहिब से लौट रहे कुछ निहंग सिखों का कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों के साथ विवाद हो गया था। विवाद बढ़ने पर मारपीट हुई और इस दौरान एक निहंग सिख द्वारा तलवार चलाए जाने की घटना भी सामने आई थी, जिसमें कई लोग घायल हुए थे।
इस मामले में पुलिस ने तीन निहंग सिखों को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि नगरासू गुरुद्वारे में मौजूद निहंग सिख उन्हीं गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग कर रहे थे, जिससे विवाद और गहरा गया था।
पंजाब और उत्तराखंड सरकारों के बीच भी हुई बातचीत
नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बातचीत कर चुके हैं। दोनों राज्यों के स्तर पर भी मामले को संवेदनशीलता के साथ सुलझाने का प्रयास किया गया।
इसी बीच दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि DSGMC का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिला और 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई घटना पर विस्तार से चर्चा की।
हरमीत सिंह कालका ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी पूरे मामले की गंभीरता से निगरानी कर रहे हैं और राज्य के डीजीपी द्वारा घोषित जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मामले में जल्द कार्रवाई होगी और क्रॉस एफआईआर सहित सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी। साथ ही जिन पुलिस अधिकारियों पर मारपीट के आरोप लगे हैं, उनसे भी पूछताछ कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल नगरासू गुरुद्वारा परिसर में स्थिति सामान्य बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।






