पौड़ी गढ़वाल: अंकिता भंडारी के परिवार समेत उनका पूरा गांव इन दिनों एक बड़ी परेशानी से गुजर रहा है। अंकिता भंडारी का गांव इस वक्त दहशत के माहौल में जी रहा है। दहशत की वजह हैं जंगली जानवर, जो लगातार गांव और आसपास के इलाकों में दिखाई दे रहे हैं। बीते दिनों जहां अंकिता भंडारी के माता-पिता का सामना भालू से हुआ था, वहीं अब गुलदार की दस्तक ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार, अंकिता भंडारी के घर के आंगन के पास ही गुलदार को देखा गया है। गुलदार की मौजूदगी के बाद से अंकिता के माता-पिता ही नहीं, बल्कि पूरा गांव डरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से कतरा रहे हैं और बच्चों को अकेले बाहर भेजना भी मुश्किल हो गया है।
अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी ने बताया कि कुछ दिन पहले वह देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर लौट रहे थे। लौटते समय रास्ते में उनकी पत्नी की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते उन्होंने गांव पहुंचने से पहले ही गाड़ी रुकवाई। इस दौरान उनकी पत्नी गाड़ी से उतरकर उल्टी करने लगीं। तभी उनकी नजर अपनी ओर आते भालू पर पड़ी।
वीरेंद्र भंडारी ने बताया कि भालू को देखकर वह, उनकी पत्नी और ड्राइवर तुरंत तेजी से गाड़ी में बैठे और वहां से निकल गए, जिससे उनकी जान बच सकी। इस घटना के बाद से ही अंकिता भंडारी के माता-पिता काफी दहशत में हैं। इसी डर के बीच हाल ही में उन्हें अपने घर के आंगन के पास एक गुलदार भी दिखाई दिया, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि अंकिता भंडारी के गांव डोभ श्रीकोट और आसपास के इलाकों में जंगली जानवरों की मौजूदगी की आशंका बनी हुई है, जो अक्सर गांव की तरफ आ रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं। दिन ढलने के बाद तो हालात और भी भयावह हो जाते हैं।
वीरेंद्र भंडारी ने वन विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जाए और गुलदार की दहशत से ग्रामीणों को जल्द निजात दिलाई जाए, साथ ही भालू की बढ़ती गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि बीते कुछ समय से उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों में जंगली जानवरों का आतंक देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां हाल के दिनों में भालुओं के हमले बढ़े हैं, वहीं गुलदारों की लगातार दस्तक से भी लोग डरे हुए हैं। कई जगहों पर गुलदार और भालू रिहायशी इलाकों में घुसकर लोगों पर हमला कर चुके हैं, जिसमें जान-माल का नुकसान भी हुआ है।







