देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बीते कुछ समय से लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता ने आम लोगों से लेकर विशेषज्ञों तक की चिंता बढ़ा दी थी। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि देहरादून का नाम देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल होने लगा। कई दिनों तक राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा माना जाता है।
हालांकि जनवरी के मध्य तक पहुंचते-पहुंचते राजधानी की हवा में कुछ हद तक सुधार देखने को मिला है। ताजा आंकड़ों के अनुसार देहरादून में अब AQI का स्तर 200 या इसके आसपास दर्ज किया जा रहा है, जो पहले के मुकाबले राहत जरूर देता है, लेकिन इसे सुरक्षित नहीं कहा जा सकता।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि वायु गुणवत्ता में यह सुधार भले ही सुकून देने वाला हो, लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। खासकर रात के समय हवा में प्रदूषण का स्तर अधिकतम हो जाता है, जिससे सांस के मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदूषण बढ़ने के पीछे ये हैं बड़े कारण
देहरादून में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आए हैं। सर्दियों के मौसम में बारिश न होना, हवा का ऊपर की ओर न उठ पाना और वातावरण में प्रदूषक तत्वों का लंबे समय तक ठहरे रहना इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही है। इसके चलते हवा में PM 2.5 और PM 10 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई थी, जो फेफड़ों और हृदय से जुड़ी बीमारियों के लिए बेहद घातक माने जाते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रयास
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कई स्तरों पर कदम उठाए। शहर के प्रमुख इलाकों में सड़कों पर पानी का छिड़काव कराया गया, ताकि उड़ती धूल को रोका जा सके। इसके साथ ही निर्माण कार्यों के दौरान पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर सख्ती बरती गई और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए गए।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि वायु गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। इन प्रयासों के चलते PM 2.5 और PM 10 के स्तर में धीरे-धीरे कमी दर्ज की जा रही है।
मौसम से राहत की उम्मीद
मौसम विभाग की ओर से भी राहत की उम्मीद जताई गई है। आने वाले दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना व्यक्त की गई है। यदि ऐसा होता है तो बारिश के साथ वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषक तत्व जमीन पर बैठ जाएंगे, जिससे वायु गुणवत्ता में और सुधार आने की संभावना है।
फिलहाल देहरादून की हवा ने भले ही थोड़ी राहत दी हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए लगातार और सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि राजधानी की हवा एक बार फिर साफ और सुरक्षित बन सके।
गौरतलब है कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 201 से ऊपर खराब माना जाता है, जिसे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है। वहीं AQI 300 से ऊपर बेहद खराब और 400 से 500 के बीच गंभीर स्थिति मानी जाती है।







