रुद्रप्रयाग/पौड़ी:
उत्तराखंड बोर्ड ने आज हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस वर्ष भी लड़कियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बाजी मारी है। रिजल्ट घोषित होते ही प्रदेशभर में खुशी का माहौल है। अभिभावक और शिक्षक विद्यार्थियों की सफलता पर गर्व जता रहे हैं, वहीं हर जिले से प्रतिभाशाली छात्रों की प्रेरणादायक कहानियां सामने आ रही हैं।
रुद्रप्रयाग जिले में छात्रों का शानदार प्रदर्शन:
रुद्रप्रयाग जिले में हाईस्कूल परीक्षा में ब्राइटलैंड इंटरनेशनल सेकेंडरी स्कूल, चंद्रापुरी के छात्र प्रतीक नौटियाल ने 476 अंक (95.20%) हासिल कर जिले में पहला स्थान प्राप्त किया। गुरुकुल नेशनल स्कूल, अगस्त्यमुनि के आयुष सिंह राणा ने 474 अंक (94.80%) के साथ दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि चिल्ड्रन एकेडमी इंटर कॉलेज, अगस्त्यमुनि के वंशज उछोली ने 470 अंक (94.00%) प्राप्त कर तीसरा स्थान हासिल किया।
इसके अलावा एमजीजीएसवीएम इंटर कॉलेज, बेलानी के प्रतीक बुटोला, अभिनव रावत और अंशिका जग्गी, गुरुकुल नेशनल स्कूल के अंश गोस्वामी, अतुल मॉडल पब्लिक इंटर कॉलेज, तिलवाड़ा की आरुषि और निकुंज, जनता हाई स्कूल मणिपुर चाका की अंशिका, तथा सीएआईसी अगस्त्यमुनि के आयोग नेगी और पयाश सिंह बिष्ट ने भी मेरिट सूची में स्थान बनाकर जिले का नाम रोशन किया।
इंटरमीडिएट में भी उत्कृष्ट परिणाम:
इंटरमीडिएट परीक्षा में गौरी मेमोरियल पब्लिक इंटर कॉलेज के शिवम मलेठा ने 96.2 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया और प्रदेश की मेरिट सूची में छठा स्थान पाया। इसी विद्यालय के आदित्य नौटियाल ने 94.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जिले में दूसरा स्थान और प्रदेश स्तर पर 16वीं रैंक हासिल की।
पौड़ी की महक ने प्रदेश में बनाई जगह:
पौड़ी जिले के पोखरीखेत की छात्रा महक ने इंटरमीडिएट परीक्षा में 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में 7वां स्थान हासिल किया है। जनता इंटर कॉलेज पोखरीखेत की इस होनहार छात्रा की सफलता से परिवार, विद्यालय और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है।
संघर्ष और मेहनत की मिसाल बनी महक:
महक ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग को दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने घर पर रहकर नियमित पढ़ाई की। महक की माता आंगनबाड़ी कार्यकर्ती होने के साथ-साथ दुकान भी संभालती हैं, जबकि उनका छोटा भाई कक्षा 9 में पढ़ता है। वर्ष 2017 में पिता के निधन के बाद उनकी मां ने ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाली। ऐसे हालात में महक की यह सफलता एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड बोर्ड के इस वर्ष के परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद मेहनत और लगन से सफलता हासिल की जा सकती है।







