रुद्रपुर (उधम सिंह नगर): जिले में लगातार बढ़ते तापमान और मौसम विभाग द्वारा जारी हीट वेव अलर्ट के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने सभी सरकारी, गैर-सरकारी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन समय में तत्काल प्रभाव से बदलाव के आदेश जारी किए हैं। साथ ही आदेशों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के पूर्वानुमान का हवाला देते हुए कहा गया है कि उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में भीषण गर्मी और लू का प्रभाव लगातार बना हुआ है। तापमान में लगातार वृद्धि के कारण डिहाइड्रेशन, लू लगना और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। विशेष रूप से छोटे बच्चों, छात्र-छात्राओं, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए यह स्थिति अधिक जोखिमपूर्ण बताई गई है।
स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों का नया समय निर्धारित
प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार 20 मई 2026 से अगले एक सप्ताह तक जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र, प्री-नर्सरी से कक्षा 12 तक के सरकारी एवं निजी विद्यालय अब सुबह 7:00 बजे से 11:30 बजे तक ही संचालित होंगे। इसके बाद सभी शिक्षण संस्थानों में अवकाश रहेगा।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था पूरी तरह एहतियातन तौर पर लागू की गई है और मौसम की स्थिति को देखते हुए इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हीट वेव के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह निर्णय आवश्यक हो गया था। उन्होंने सभी विद्यालय प्रबंधन समितियों, संचालकों और संबंधित अधिकारियों को आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि कोई शिक्षण संस्थान आदेशों की अवहेलना करता पाया गया तो उसके खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
अभिभावकों से प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों को तेज धूप में बाहर न निकलने दें, उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं और गर्मी से बचाव के सभी आवश्यक उपाय अपनाएं।
लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए प्रशासन का यह कदम छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिससे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा सके।







