देहरादून: राजधानी देहरादून में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच के लिए तैयार की गई अत्याधुनिक फूड टेस्टिंग लैब का उद्घाटन एक बार फिर टल गया। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) मुख्यालय के तीसरे तल पर करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस हाईटेक लैब का शुभारंभ सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के हाथों होना था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी उद्घाटन नहीं हो सका। करीब चार घंटे तक इंतजार करने के बाद कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, लंबे समय से प्रदेश में आधुनिक फूड टेस्टिंग सुविधा की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार की अनुमति और सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद देहरादून स्थित एफडीए मुख्यालय में अत्याधुनिक फूड टेस्टिंग लैब तैयार की गई। विभाग ने 8 जून को इसके लोकार्पण का कार्यक्रम तय किया था और स्वास्थ्य मंत्री से समय लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं।
निर्धारित कार्यक्रम के तहत अधिकारियों ने उद्घाटन समारोह की सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया था। मंत्री के स्वागत के लिए फूलों के गुलदस्ते, अतिथियों के लिए जलपान और अन्य आवश्यक प्रबंध भी किए गए थे। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री की व्यस्त बैठकों के चलते वे कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंच सके। विभागीय अधिकारियों ने कई घंटों तक इंतजार किया, लेकिन अंततः उन्हें सूचना मिली कि फिलहाल कार्यक्रम को स्थगित किया जा रहा है और उद्घाटन के लिए नई तिथि निर्धारित की जाएगी।
यह पहली बार नहीं है जब लैब के उद्घाटन का कार्यक्रम टला हो। सूत्रों के अनुसार इससे पहले भी दो से तीन बार उद्घाटन की तारीख तय की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से कार्यक्रम नहीं हो पाया। ऐसे में इस बार भी उद्घाटन स्थगित होने से विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों में निराशा देखी गई।
उद्घाटन समारोह के लिए रुद्रपुर स्थित फूड टेस्टिंग लैब से भी कई तकनीशियन, विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और अन्य कर्मचारी देहरादून पहुंचे थे। कार्यक्रम स्थगित होने की सूचना मिलने के बाद सभी को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। विभाग के कई अधिकारियों ने उम्मीद जताई थी कि उद्घाटन के बाद यह लैब प्रदेश में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती देगी।
एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह ने बताया कि देहरादून में तैयार की गई यह लैब रुद्रपुर लैब की तुलना में अधिक आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत है। लैब में अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जो खाद्य पदार्थों में मौजूद विभिन्न तत्वों और संभावित मिलावट की सटीक पहचान करने में सक्षम हैं।
उन्होंने बताया कि देहरादून लैब की वार्षिक जांच क्षमता लगभग 5,000 सैंपल की है, जबकि रुद्रपुर लैब में प्रतिवर्ष करीब 2,500 सैंपलों की जांच की जाती है। नई लैब के शुरू होने से खाद्य पदार्थों की जांच प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगी।
ताजबर सिंह के अनुसार, नियमों के तहत किसी भी सैंपल की जांच रिपोर्ट जारी करने के लिए 14 दिनों का समय निर्धारित है, लेकिन देहरादून की हाईटेक लैब में अत्याधुनिक तकनीक होने के कारण रिपोर्ट इससे पहले ही उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव हो पाएगी।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लंबे समय से तैयार इस बहुप्रतीक्षित फूड टेस्टिंग लैब का उद्घाटन आखिर कब होगा। लैब के संचालन शुरू होने के बाद न केवल देहरादून बल्कि पूरे उत्तराखंड में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच व्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।







