विकासनगर: देहरादून जिले के सहसपुर क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां अपनी गर्भवती पत्नी के साथ कथित रूप से मारपीट करने वाले पति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि पति की बेरहमी के कारण गर्भ में पल रहे आठ माह के अजन्मे शिशु की मौत हो गई। महिला की गंभीर हालत को देखते हुए उसे दून अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों को ऑपरेशन के जरिए मृत शिशु को बाहर निकालना पड़ा। फिलहाल पीड़िता का उपचार जारी है।
पुलिस के अनुसार, 9 जून को सहसपुर क्षेत्र के बालूवाला निवासी शेर सिंह ने कोतवाली सहसपुर में तहरीर देकर अपनी बेटी सीमा के साथ हो रहे उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सीमा का पति बबलू, जो मूल रूप से हरियाणा के पानीपत जिले का निवासी है और वर्तमान में जस्सोवाला में रह रहा था, लंबे समय से उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था।
परिजनों का आरोप है कि सीमा पहले से दो बेटियों की मां है और तीसरी बार करीब आठ माह की गर्भवती थी। इसी बीच बेटे की चाहत को लेकर पति द्वारा उस पर दबाव बनाया जा रहा था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि महिला को जबरन हरियाणा ले जाकर भ्रूण लिंग परीक्षण कराया गया। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान लिंग परीक्षण के आरोपों की पुष्टि फिलहाल नहीं हो पाई है और इस संबंध में अलग से जांच की जा रही है।
आरोप है कि जब आरोपी को यह आशंका हुई कि गर्भ में पल रहा शिशु भी बेटी है, तो उसने अपना आपा खो दिया। पीड़िता के परिजनों के मुताबिक आरोपी ने अपनी पत्नी के साथ मारपीट की, उसके पेट पर लात मारी और उसे करंट लगाकर जान से मारने की कोशिश भी की। इस हिंसा का गंभीर असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ा और उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उसे तत्काल राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल, देहरादून में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत शिशु को ऑपरेशन के माध्यम से बाहर निकाला। चिकित्सकों के प्रयासों से महिला की जान बच गई, लेकिन वह अभी भी अस्पताल में उपचाराधीन है।
सहसपुर कोतवाल प्रदीप रावत ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के बाद उपनिरीक्षक नीरज त्यागी के नेतृत्व में पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी बबलू को उसके जस्सोवाला स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि 6 जून को उसका पत्नी के साथ विवाद हुआ था। इसी दौरान उसने लकड़ी के फट्टे से पत्नी की पिटाई की थी। पुलिस के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले में गंभीर धाराएं भी बढ़ाई गई हैं। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
कोतवाल प्रदीप रावत ने बताया कि भ्रूण लिंग परीक्षण के आरोपों की भी जांच की जा रही है, लेकिन अब तक उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। यदि जांच में ऐसे किसी अवैध कार्य के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि भारत में भ्रूण लिंग जांच पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है। कानून के तहत गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग जानना या बताना अपराध की श्रेणी में आता है। इस अपराध में शामिल डॉक्टर, क्लिनिक संचालक और अन्य व्यक्तियों को तीन से पांच वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
यह घटना न केवल घरेलू हिंसा की भयावह तस्वीर पेश करती है, बल्कि बेटा-बेटी के भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। एक अजन्मे शिशु की मौत और एक महिला पर हुए अत्याचार ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। अब सभी की निगाहें इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।







