देहरादून: उत्तराखंड के दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग और पर्वतारोहण के दौरान हादसों का सिलसिला लगातार जारी है। एक बार फिर प्रदेश के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र से ऐसी घटना सामने आई है, जिसने 19 सदस्यीय पर्वतारोहण दल की सांसें थाम दीं। बागेश्वर जिले में ट्रेल्स पास अभियान के दौरान पर्वतारोहियों के बेहद करीब से एक विशाल हिमस्खलन गुजर गया। कुछ सेकेंड की सतर्कता और त्वरित निर्णय ने पूरे दल की जान बचा ली। यदि थोड़ी भी देरी होती तो यह अभियान एक बड़े हादसे में बदल सकता था।
जानकारी के अनुसार बागेश्वर जिले में 5,312 मीटर ऊंचाई पर स्थित ट्रेल्स पास अभियान के दौरान यह भयावह घटना हुई। अभियान में शामिल 19 सदस्यीय पर्वतारोहण दल ने अपनी आंखों के सामने पहाड़ की ऊपरी ढलानों से बर्फ का विशाल हिस्सा टूटकर नीचे आते देखा। कुछ ही क्षणों में गर्जना के साथ बर्फ का बड़ा गुबार पूरे क्षेत्र में फैल गया और आसपास का इलाका सफेद धुंध जैसी बर्फ से ढक गया।
अभियान दल इससे पहले भी कई कठिन चुनौतियों का सामना कर चुका था। सदस्यों ने बर्फीले तूफानों, गहरी हिम दरारों और लगातार हो रही भारी बर्फबारी के बीच ट्रेल्स पास को सफलतापूर्वक पार किया था। अभियान का नेतृत्व कर रहे दिनेश सिंह दानू ने बताया कि पास से उतराई के दौरान मौसम पूरी तरह साफ था, लेकिन तेज धूप के कारण बर्फ नरम होने लगी थी। ऐसे हालात में हिमस्खलन का खतरा काफी बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि जब दल अंतिम खड़ी ढलान को पार कर रहा था, तभी नीचे मौजूद स्पोर्ट टीम ने अचानक हिमस्खलन की चेतावनी दी। चेतावनी मिलते ही सभी पर्वतारोही तत्काल सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ पड़े। कुछ ही सेकेंड बाद विशाल हिमस्खलन उनके बेहद करीब से गुजर गया।
दिनेश सिंह दानू के अनुसार यदि निर्णय लेने में पांच सेकेंड की भी देरी होती तो पूरा दल हिमस्खलन की चपेट में आ सकता था। हालांकि सभी सदस्यों ने संयम और सतर्कता का परिचय दिया, जिसके चलते कोई जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद हालात सामान्य होने पर दल ने अपना सफर जारी रखा और नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप के रास्ते सुरक्षित रूप से मुनस्यारी पहुंच गया।
यह घटना एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में पर्वतारोहण और ट्रैकिंग के दौरान सुरक्षा, मौसम की निगरानी और त्वरित निर्णय क्षमता के महत्व को रेखांकित करती है। पर्वतारोहियों ने प्रकृति के रौद्र रूप को बेहद करीब से देखा और मौत के मुहाने से सुरक्षित लौटकर एक बड़ी राहत की सांस ली।






