उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से एक दुखद खबर सामने आई है। जंगल की आग पर काबू पाने के दौरान वन विभाग के एक फॉरेस्ट गार्ड की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने वन विभाग के कर्मचारियों के सामने मौजूद जोखिमों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। मृतक फॉरेस्ट गार्ड की पहचान सोहन सिंह रावत के रूप में हुई है, जो जंगलों को आग से बचाने के अभियान में जुटे हुए थे।
जानकारी के अनुसार उत्तरकाशी के पेरोला क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से जंगल में आग लगी हुई थी। आग पर नियंत्रण पाने के लिए वन विभाग की टीम लगातार प्रयास कर रही थी। इसी दौरान फॉरेस्ट गार्ड सोहन सिंह रावत भी अपनी ड्यूटी निभाते हुए आग बुझाने के कार्य में लगे थे। बताया जा रहा है कि आग बुझाने के दौरान वह दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में पहुंच गए, जहां हादसे का शिकार हो गए।
जब देर शाम तक सोहन सिंह रावत घर नहीं लौटे तो परिजनों और विभागीय अधिकारियों को चिंता हुई। इसके बाद उनकी तलाश शुरू की गई। रातभर चले खोज अभियान के बाद अगले दिन जंगल क्षेत्र में उनका शव बरामद हुआ। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आग बुझाने के दौरान उनका पैर फिसल गया और वह पहाड़ी से नीचे गहरी खाई में जा गिरे, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वहीं पुलिस भी मामले की जांच में जुटी हुई है।
इस दुखद हादसे के बाद वन विभाग में शोक की लहर है। सहकर्मियों ने सोहन सिंह रावत को एक कर्मठ और समर्पित कर्मचारी बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहीं स्थानीय ग्रामीणों ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
गौरतलब है कि गर्मियों के मौसम में उत्तराखंड के जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में वन विभाग के कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर जंगलों और वन्यजीवों को बचाने का काम करते हैं। सोहन सिंह रावत की मौत ने एक बार फिर जंगलों में आग बुझाने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था और संसाधनों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।






