अब सुनसान नहीं रहेंगे पौड़ी के मंडल मुख्यालय कार्यालय, अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित करेंगे गढ़वाल कमिश्नर

देहरादून/पौड़ी: गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी को लेकर लंबे समय से उठते रहे सवालों के बीच अब प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्षों से अधिकारियों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे मंडल मुख्यालय के कार्यालयों में अब नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस पहल शुरू हो गई है। गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप ने स्पष्ट कर दिया है कि मंडल मुख्यालय केवल कागजों में नहीं, बल्कि व्यवहारिक रूप से भी सक्रिय दिखाई देना चाहिए।

वर्षों से उठते रहे हैं सवाल

गढ़वाल मंडल मुख्यालय के रूप में पौड़ी की स्थापना का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को प्रशासनिक सुविधाएं उनके नजदीक उपलब्ध कराना था। हालांकि वास्तविकता यह रही कि कई महत्वपूर्ण विभागों के कार्यालय पौड़ी में होने के बावजूद अधिकांश प्रशासनिक गतिविधियां देहरादून से संचालित होती रहीं।

आम लोगों की शिकायत रही कि मंडल मुख्यालय पहुंचने के बावजूद उन्हें संबंधित अधिकारी नहीं मिलते थे। कई मामलों में लोगों को अपने कार्यों के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे या फिर सीधे देहरादून का रुख करना पड़ता था।

राजधानी में बैठकर काम करना समझा गया सुविधाजनक

लंबे समय तक विभिन्न विभागों के अधिकारी राजधानी देहरादून में बैठकर काम करना अधिक सुविधाजनक समझते रहे। इसका सबसे बड़ा कारण यह भी माना गया कि गढ़वाल मंडलायुक्त स्वयं भी कई अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण नियमित रूप से पौड़ी में उपलब्ध नहीं रह पाते थे।

अब तक जिन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को गढ़वाल कमिश्नर की जिम्मेदारी दी गई, उन्हें सरकार की ओर से कई अन्य महत्वपूर्ण दायित्व भी सौंपे गए थे। परिणामस्वरूप उनका अधिकांश समय देहरादून में ही व्यतीत होता था। ऐसे में अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना भी चुनौती बना रहता था।

कई वर्षों बाद मिला पूर्णकालिक कमिश्नर

गढ़वाल मंडल को लंबे समय बाद पूर्णकालिक कमिश्नर मिलने से प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद जगी है। पदभार ग्रहण करने के बाद गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मंडल मुख्यालय की उपयोगिता को मजबूत किया जाएगा।

उन्होंने स्वयं पौड़ी स्थित मंडल मुख्यालय में नियमित रूप से बैठने का निर्णय लिया है और इसकी शुरुआत अपने स्तर से कर दी है। प्रशासनिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

अधिकारियों और कर्मचारियों को दिए सख्त निर्देश

कमिश्नर आनंद स्वरूप ने मंडल स्तर के विभिन्न विभागों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को भी पौड़ी स्थित कार्यालयों में नियमित रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। उनका मानना है कि जब अधिकारी अपने निर्धारित मुख्यालय में उपलब्ध रहेंगे तभी जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि मंडल मुख्यालय की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना सबसे जरूरी है।

मुख्यालय छोड़ने पर देनी होगी सूचना

नई व्यवस्था के तहत अब अधिकारियों के मुख्यालय से बाहर जाने के लिए भी नियम तय किए गए हैं। यदि किसी अधिकारी को अपने कार्यालय या मुख्यालय से बाहर जाना होगा तो उसे पहले इसकी जानकारी देनी होगी और आवश्यक होने पर अनुमति भी प्राप्त करनी होगी।

इस कदम का उद्देश्य बिना सूचना के अनुपस्थिति की प्रवृत्ति पर रोक लगाना और जनता को अनावश्यक परेशानी से बचाना है।

अतिरिक्त जिम्मेदारियों वाले अधिकारी भी दायरे में

इस व्यवस्था की खास बात यह है कि एक से अधिक जिम्मेदारियां संभाल रहे अधिकारियों को भी इसके दायरे में लाया गया है। अब ऐसे अधिकारियों को यह तय करना होगा कि वे सप्ताह या महीने के किन दिनों में पौड़ी स्थित कार्यालय में उपलब्ध रहेंगे।

इसके साथ ही अधिकारियों की उपलब्धता संबंधी जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, ताकि आम नागरिकों को पहले से पता रहे कि संबंधित अधिकारी किस दिन कार्यालय में मिलेंगे।

जनता की नाराजगी का रहा है मुद्दा

गढ़वाल मंडल मुख्यालय की उपेक्षा को लेकर अतीत में कई बार स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। लोगों का कहना रहा है कि मंडल मुख्यालय होने के बावजूद पौड़ी को उसका वास्तविक प्रशासनिक महत्व नहीं मिल पा रहा है।

राजनीतिक दलों ने भी समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया और अधिकारियों की अनुपस्थिति पर सवाल खड़े किए। कई बार इसे पर्वतीय क्षेत्रों की उपेक्षा से जोड़कर भी देखा गया।

व्यवस्था लागू हुई तो मिलेगा बड़ा लाभ

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कमिश्नर आनंद स्वरूप की यह पहल प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इससे पौड़ी की प्रशासनिक गतिविधियों को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही आम जनता को अपने कार्यों के लिए अधिकारियों के इंतजार या देहरादून के चक्कर लगाने से राहत मिल सकेगी।

फिलहाल गढ़वाल कमिश्नर कार्यालय की ओर से साफ संकेत दिए गए हैं कि जारी निर्देश केवल औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि उनके अनुपालन की भी नियमित निगरानी की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में मंडल मुख्यालय की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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