चमोली/रुद्रप्रयाग: चमोली जिले के कर्णप्रयाग बाजार में 16 जून को हुए विवाद के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। निहंग सिख यात्रियों और स्थानीय दुकानदारों के बीच हुए टकराव के बाद क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्णप्रयाग में 27 जून तक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा-163 लागू कर दी गई है। वहीं शनिवार को रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में हुई गतिविधियों के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट मोड पर आ गईं।
कर्णप्रयाग में विवाद के बाद बढ़ी सतर्कता
बीती 16 जून को कर्णप्रयाग बाजार में निहंग सिख यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों के बीच विवाद हो गया था। इस दौरान कथित रूप से तलवार चलने की घटना भी सामने आई थी, जिसमें कुछ स्थानीय लोग घायल हुए थे। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया था।
इसी को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए कर्णप्रयाग क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना और कानून-व्यवस्था की स्थिति से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
नगरासू गुरुद्वारे में हलचल से बढ़ी चौकसी
शनिवार को रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में उस समय हलचल मच गई जब कुछ निहंग श्रद्धालु गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और अपने पारंपरिक शस्त्रों का प्रदर्शन करने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में थे और उनके पास धार्मिक परंपरा से जुड़े शस्त्र मौजूद थे। शाम के समय गुरुद्वारे की लाइटें बंद होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। सुरक्षा बलों ने श्रद्धालुओं से बातचीत कर उन्हें शांतिपूर्वक नीचे उतरने के लिए समझाया।
स्थिति नियंत्रण में, कोई जनहानि नहीं
प्रशासन के अनुसार स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी प्रकार की हिंसा या जनहानि की सूचना नहीं है। एहतियात के तौर पर गुरुद्वारा परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया, हालांकि अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
27 जून तक लागू रहेगी धारा-163
कर्णप्रयाग उपजिलाधिकारी एवं परगना मजिस्ट्रेट अलकेश नौडियाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार धारा-163 के तहत लगाए गए प्रतिबंध 20 जून की शाम 7 बजे से 27 जून 2026 तक प्रभावी रहेंगे।
इस अवधि के दौरान पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एक स्थान पर एकत्र होने, जुलूस, धरना, प्रदर्शन, रैली और जनसभा आयोजित करने पर रोक रहेगी। हालांकि यह प्रतिबंध ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा।
हथियार और भड़काऊ गतिविधियों पर रोक
प्रशासन ने सार्वजनिक आयोजनों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर भी रोक लगा दी है। साथ ही लाठी, तलवार, चाकू, भाला, आग्नेयास्त्र, पेट्रोल, डीजल, तेजाब, पटाखे और अन्य खतरनाक सामग्री लेकर चलने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
इसके अलावा ईंट-पत्थर या अन्य फेंके जाने योग्य वस्तुओं का संग्रह करना, लोगों को इसके लिए प्रेरित करना तथा सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना भी प्रतिबंधित रहेगा।
सोशल मीडिया पर भी निगरानी
जारी आदेश में किसी भी धर्म, समुदाय या व्यक्ति के खिलाफ भड़काऊ भाषण, अपमानजनक टिप्पणी, नारेबाजी, अफवाह फैलाने तथा सोशल मीडिया सहित किसी भी माध्यम से भ्रामक सूचना प्रसारित करने पर भी रोक लगाई गई है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों को बिना वारंट गिरफ्तार किया जा सकता है और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा-223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने सांप्रदायिक रंग देने से किया आगाह
उत्तराखंड सरकार ने स्पष्ट किया है कि हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान हुई इस घटना को किसी भी प्रकार से धार्मिक या सांप्रदायिक विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
प्रदेश के गृह सचिव शैलेश बगौली ने कहा कि शुरुआती जांच में यह मामला धार्मिक विवाद की बजाय दो पक्षों के बीच हुए मतभेद और भावनात्मक प्रतिक्रिया से जुड़ा प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करता है और राज्य की संस्कृति सद्भाव, शांति और आपसी सम्मान पर आधारित है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निष्पक्ष जांच के निर्देश
गृह सचिव ने बताया कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए गढ़वाल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) को निर्देश दिए गए हैं। सभी पक्षों को सुनने और तथ्यों की जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के लिए अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है। प्रशासन का कहना है कि शांति और सौहार्द बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अफवाह या उकसावे की गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।






