पौड़ी गढ़वाल: गढ़वाल राइफल रेजीमेंट सेंटर लैंसडाउन के भवानी दत्त जोशी परेड ग्राउंड में शनिवार को पूरे सैन्य गौरव, अनुशासन और परंपरा के साथ अग्निवीरों की पासिंग आउट परेड संपन्न हुई। कसम परेड के साथ ही प्रशिक्षित अग्निवीर भारतीय सेना के अभिन्न अंग बन गए। इस ऐतिहासिक और भावुक क्षण के साक्षी बनने के लिए अग्निवीरों के परिजनों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी परेड ग्राउंड में मौजूद रहे।
सैन्य परंपरा और अनुशासन का दिखा अद्भुत संगम
पासिंग आउट परेड की सलामी गढ़वाल राइफल रेजीमेंट सेंटर लैंसडाउन के कमांडेंट ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने ली। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रशिक्षित अग्निवीरों को राष्ट्र की रक्षा, सम्मान और अखंडता बनाए रखने की शपथ दिलाई।
जब अग्निवीरों ने गर्व के साथ गढ़वाल राइफल रेजीमेंट की प्रतिष्ठित रॉयल रस्सी अपने कंधों पर धारण की, तो पूरा परेड मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह दृश्य वहां मौजूद परिजनों और दर्शकों के लिए गर्व और भावनाओं से भरा हुआ था।
वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि
पासिंग आउट परेड के बाद अग्निवीर सैनिकों ने युद्ध स्मारक पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को सलामी दी और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पूरे परिसर में देशभक्ति का माहौल देखने को मिला।
परेड समाप्त होने के बाद परिजनों ने अपने बेटों को गले लगाकर बधाई दी। कई माता-पिता और परिजन भावुक नजर आए और उन्होंने जवानों के माथे चूमकर देश सेवा के लिए शुभकामनाएं दीं।
छठे बैच के अग्निवीरों ने पूरी की कठिन ट्रेनिंग
इस अवसर पर कमांडेंट ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने बताया कि यह अग्निवीरों का छठा बैच है, जिसने पिछले छह महीनों में कठिन और चुनौतीपूर्ण सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
उन्होंने बताया कि कुल 374 अग्निवीरों में से 259 अग्निवीरों ने पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया, जबकि शेष अग्निवीर विशेष और अतिरिक्त प्रशिक्षण के लिए अन्य स्थानों पर भेजे गए हैं।
उन्होंने कहा कि गढ़वाल राइफल्स का इतिहास वीरता, त्याग और पराक्रम से भरा हुआ है और इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब इन नए जवानों के कंधों पर है।
गढ़वाल की वीर भूमि पर गर्व
ब्रिगेडियर नेगी ने कहा कि गढ़वाल क्षेत्र सदियों से वीर सैनिकों की भूमि रहा है। यहां के जवानों ने विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों में अपने साहस और शौर्य का परिचय देकर देश का नाम रोशन किया है।
उन्होंने कहा कि आज भी गढ़वाल के गांव-गांव में सैनिक परिवार मौजूद हैं और युवाओं में सेना के प्रति विशेष आकर्षण और समर्पण देखने को मिलता है।
चौथी पीढ़ी भी पहुंची सेना में
परेड में शामिल परिजनों के लिए यह अवसर बेहद खास रहा। काशीपुर से पहुंचे एक परिवार ने बताया कि उनकी चौथी पीढ़ी अब गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट का हिस्सा बनी है।
परिजनों ने कहा कि परिवार की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी का सेना में शामिल होना उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने अग्निवीर योजना के तहत सेना में शामिल हुए युवाओं को देश सेवा के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
देश सेवा के नए सफर की शुरुआत
पासिंग आउट परेड के साथ ही इन अग्निवीरों के जीवन का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। छह महीने के कठिन प्रशिक्षण के बाद अब ये जवान भारतीय सेना के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए देश की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए तैयार हैं।
लैंसडाउन की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित यह परेड न केवल सैन्य अनुशासन और परंपरा का प्रतीक बनी, बल्कि देशभक्ति, समर्पण और गर्व की भावना से भी ओतप्रोत रही।






