देहरादून: राज्य में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी गई है। यह एसओपी विधानसभा और सचिवालय को छोड़कर राज्य के सभी शासकीय कार्यालयों में लागू होगी।
हाल ही में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल के साथ हुई मारपीट की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। आरोप है कि एक विधायक के समर्थकों ने उनकी मौजूदगी में ही उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षक संगठनों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश देखा गया। इसके बाद सरकार ने सुरक्षा को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
किन कार्यालयों में लागू होगी एसओपी?
नई एसओपी विधानसभा और सचिवालय को छोड़कर राज्य के सभी शासकीय कार्यालयों में लागू होगी। विभागीय सचिव स्तर पर इसके लिए अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी।
यह नियम आम जनता, निजी ठेकेदारों, जनप्रतिनिधियों, उनके समर्थकों और व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारियों सहित सभी आगंतुकों पर समान रूप से लागू होंगे।
प्रवेश और पहचान से जुड़े सख्त नियम
एसओपी के तहत अब सरकारी कार्यालयों में प्रवेश पूरी तरह नियंत्रित रहेगा।
- सभी कर्मचारियों के लिए पहचान पत्र धारण करना अनिवार्य होगा।
- बिना आईडी कार्ड प्रवेश नहीं मिलेगा।
- आम जनता के वाहनों का कार्यालय परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
- मुख्य द्वार पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाए जाएंगे।
- बिना पूर्व अनुमति किसी विशिष्ट व्यक्ति को भी प्रवेश नहीं मिलेगा।
सुरक्षा चौकी पर एक फोटोयुक्त “नो एंट्री पंजिका” रखी जाएगी, जिसमें दुर्व्यवहार या हिंसा के दोषी व्यक्तियों का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा।
मुलाकात के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य
अब किसी भी अधिकारी से मिलने के लिए पहले से समय लेना अनिवार्य होगा।
- बिना अपॉइंटमेंट सीधे अधिकारी कक्ष में प्रवेश नहीं मिलेगा।
- एक समय में अधिकतम दो व्यक्तियों को ही अधिकारी कक्ष में प्रवेश की अनुमति होगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य भीड़भाड़, दबाव या सामूहिक आक्रामकता की स्थिति को रोकना है।
प्रतिबंधित वस्तुओं पर पूरी रोक
सरकारी कार्यालय परिसर में ज्वलनशील पदार्थ, स्याही, लाठी-डंडा, हथियार या किसी भी आपत्तिजनक वस्तु लाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
इसके अलावा वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी, ताकि अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं को रोका जा सके।
निगरानी और तकनीकी सुरक्षा
- प्रवेश द्वार, गलियारों और संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
- अधिकारियों की डेस्क के नीचे या रिसेप्शन पर गुप्त साइलेंट पैनिक अलार्म की व्यवस्था होगी।
- आपात स्थिति में अधिकारी इस अलार्म के माध्यम से तुरंत सुरक्षा कर्मियों को सूचना दे सकेंगे।
यदि किसी कार्यालय में विशेष सुरक्षा खतरे की आशंका हो तो विभागीय सचिव अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर सकेंगे।
घटना के बाद की कार्रवाई
एसओपी में घटना के बाद की प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है।
- घटना स्थल को तत्काल सील किया जाएगा।
- सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखकर जांच अधिकारी को सौंपी जाएगी।
- जांच निरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा की जाएगी।
- अधिकतम दो माह के भीतर जांच पूरी करने का प्रावधान रखा गया है।
क्या होगा फायदा?
इस एसओपी से सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को सुरक्षित और भयमुक्त कार्य वातावरण मिलेगा। प्रवेश नियंत्रण, तकनीकी निगरानी और स्पष्ट नियमों से बाहरी हस्तक्षेप और आक्रामक व्यवहार पर अंकुश लगेगा।
साथ ही, समयबद्ध जांच और सख्त कार्रवाई की व्यवस्था से दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई संभव होगी। सरकार का कहना है कि लोक सेवकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए यह व्यवस्था प्रभावी साबित होगी।







