पौड़ी: जनपद पौड़ी के देवप्रयाग क्षेत्र में जंगल की भीषण आग ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. बाह बाजार के निकट जंगल में लगी आग धीरे-धीरे रिहायशी इलाकों और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रघुनाथ कीर्ति परिसर तक पहुंचने लगी, जिससे पूरे इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया. देर शाम तक जंगल से उठती आग की ऊंची-ऊंची लपटें दूर-दूर तक दिखाई देती रहीं, जबकि धुएं के गुबार से आसपास के गांवों में दहशत फैल गई. काफी मशक्कत के बाद देर रात आग पर काबू पाया जा सका, जिसके बाद स्थानीय लोगों और परिसर प्रशासन ने राहत की सांस ली.
जानकारी के अनुसार, देवप्रयाग नगरपालिका के वार्ड संख्या चार स्थित बाह बाजार क्षेत्र में यह आग सौड़ गांव की ओर से फैलते हुए पहुंची. इससे पहले भी नृसिंहाचल पर्वत पर लगी जंगल की आग को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय रघुनाथ कीर्ति परिसर के अध्यापकों और वन विभाग की टीम ने करीब चार घंटे की कड़ी मेहनत के बाद बुझाया था. लेकिन दो दिन बाद एक बार फिर जंगल में आग भड़क उठी और धीरे-धीरे विश्वविद्यालय परिसर की ओर बढ़ने लगी. स्थिति गंभीर होते देख परिसर प्रशासन ने तुरंत वन विभाग, दमकल विभाग और पुलिस को सूचना दी.
पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण राहत और बचाव कार्य में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. वन विभाग की टीमों ने एक ओर से आग पर काबू पाने की कोशिश की और काफी हद तक सफलता भी मिली, लेकिन दूसरी ओर तेज हवाओं के कारण आग लगातार भड़कती रही. दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन घटनास्थल तक पाइप नहीं पहुंच पाने के कारण आग बुझाने में बाधाएं आईं.
स्थिति को गंभीर देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियातन छात्रों और कर्मचारियों से आवास खाली करा दिए. छात्रावास के ऊपर उठती आग की लपटों को देखकर छात्र और कर्मचारी भी सहम गए. कुछ ही देर में आग बाह बाजार के ऊपर स्थित जंगल तक पहुंच गई और बस्ती की ओर तेजी से फैलने लगी. तेज हवाओं के चलते हालात और ज्यादा खतरनाक हो गए, जिससे स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया. ग्रामीण अपने घरों और पशुओं को सुरक्षित बचाने के प्रयास में जुट गए.
वन विभाग की टीमों ने स्थानीय लोगों के सहयोग से लगातार कई घंटों तक आग बुझाने का अभियान चलाया. कड़ी मशक्कत के बाद आग को रिहायशी इलाकों तक पहुंचने से रोक लिया गया. हालांकि सोमवार को भी कई स्थानों पर आग फैलने की घटनाएं सामने आती रहीं. बाह बाजार के ऊपर स्थित खेड़ा गांव चारों ओर से आग की चपेट में आ गया, जिसके बाद ग्रामीण खुद आग बुझाने में जुट गए.
जंगल की आग के कारण पूरे क्षेत्र में गहरा धुआं फैल गया है, जिससे लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हो रही है. वहीं आग के चलते तापमान में भी अचानक बढ़ोतरी महसूस की गई. आग का असर वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. जंगल से भागकर कई जंगली जानवर और पक्षी आबादी वाले क्षेत्रों और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर की ओर पहुंचने लगे हैं. पिछले तीन दिनों से परिसर के आसपास लगातार गुलदार दिखाई देने की घटनाएं सामने आई हैं, जबकि कई घायल पक्षी भी सड़कों और बस्तियों में नजर आए.
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रघुनाथ कीर्ति परिसर के निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी ने जंगल की आग की घटनाओं का गंभीरता से संज्ञान लिया है. भविष्य में परिसर को इस तरह की घटनाओं से सुरक्षित रखने के लिए विस्तृत योजना तैयार की जाएगी, जिसमें वन विभाग और स्थानीय प्रशासन का सहयोग लिया जाएगा. वहीं स्थानीय लोगों ने वन विभाग से जंगलों की निगरानी बढ़ाने और आग लगने की घटनाओं पर सख्त नियंत्रण की मांग की है.







