विकासनगर: जौनसार-बावर क्षेत्र के चकराता ब्लॉक अंतर्गत मशक गांव में आस्था और उत्साह का माहौल है। छत्रधारी चालदा महासू महाराज करीब 40 वर्षों बाद गांव के नवनिर्मित मंदिर में विराजमान होने जा रहे हैं। देवता का आगमन इस वर्ष नवंबर-दिसंबर में प्रस्तावित है, जिसे लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। वर्षों से जिस मंदिर निर्माण का सपना क्षेत्रवासियों ने देखा था, वह अब साकार हो चुका है और देवता के स्वागत की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
इन दिनों छत्रधारी चालदा महासू महाराज हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जनपद के पश्मी गांव में एक वर्ष के प्रवास पर हैं। प्रवास पूर्ण होने के बाद उनका अगला पड़ाव जौनसार-बावर का मशक गांव होगा। देवता के आगमन को लेकर ग्रामीणों ने वर्षों पहले नए मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया था, जो अब लगभग पूरा हो चुका है।
प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर मशक गांव चारों ओर से देवदार के घने वृक्षों और ऊंची पर्वतमालाओं से घिरा हुआ है। ऐसे रमणीय वातावरण में तैयार किया गया यह मंदिर पारंपरिक जौनसारी वास्तुकला और लोक संस्कृति का अद्भुत उदाहरण बनकर उभरा है। मंदिर निर्माण में देवदार की लकड़ी और पत्थरों का उपयोग किया गया है, जबकि इसकी दीवारों और संरचना पर की गई नक्काशी स्थानीय शिल्पकला की उत्कृष्ट झलक प्रस्तुत करती है।
मंदिर निर्माण की सबसे विशेष बात यह है कि इसे सरकारी सहायता के बजाय ग्रामीणों के आपसी सहयोग और जनसहभागिता से तैयार किया गया है। गांव के लोगों ने चंदा एकत्रित कर मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया और निर्माण कार्य को सफल बनाया। ग्रामीणों की श्रद्धा और समर्पण इस परियोजना में साफ दिखाई देता है।
मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों में पारंपरिक धार्मिक नियमों का भी विशेष ध्यान रखा गया। मंदिर निर्माण करने वाले मिस्त्री श्याम सिंह खन्ना प्रतिदिन सुबह स्नान करने के बाद खाली पेट निर्माण कार्य शुरू करते हैं। वे दोपहर बाद भोजन ग्रहण करते हैं और उसके बाद मंदिर निर्माण का कार्य नहीं किया जाता। इस परंपरा का पालन पूरे निर्माण काल के दौरान किया गया है।
खत मशक गांव के सदर स्याणा फतेह सिंह ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग और सामूहिक प्रयासों से मंदिर का निर्माण संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों में छत्रधारी चालदा महासू महाराज के प्रति गहरी आस्था और अटूट विश्वास है। यही कारण है कि सभी लोग देवता के आगमन की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मंदिर समिति के अध्यक्ष कुंदन सिंह सहित जगत सिंह, गोविंद सिंह, प्रेम सिंह, महावीर सिंह और जयपाल सिंह समेत कई ग्रामीण मंदिर निर्माण कार्य में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। समिति के सदस्यों का कहना है कि देवता के आगमन को लेकर गांव में विशेष तैयारियां की जा रही हैं और पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल है।
ग्रामीणों का मानना है कि छत्रधारी चालदा महासू महाराज का आगमन क्षेत्र में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आएगा। 40 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद जब देवता नवनिर्मित मंदिर में विराजमान होंगे, तब यह अवसर न केवल मशक गांव बल्कि पूरे जौनसार-बावर क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।







