देहरादून: थानों क्षेत्र स्थित जामा मस्जिद को मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा सील किए जाने के विरोध में मुस्लिम सेवा संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकालकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने मस्जिद को सील किए जाने की कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, देहरादून के थानों क्षेत्र में स्थित जामा मस्जिद को तीन दिन पूर्व एमडीडीए ने सील कर दिया था। प्राधिकरण की इस कार्रवाई के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम सेवा संगठन से जुड़े लोग पुराने बस अड्डे पर एकत्रित हुए, जहां से उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया।
मुस्लिम सेवा संगठन के अध्यक्ष नईम कुरैशी ने कहा कि थानों की जामा मस्जिद वर्षों से क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र रही है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा करने पहुंचते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त संवाद, पूर्व सूचना और वैकल्पिक प्रक्रिया अपनाए धार्मिक स्थल को सील करना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे हजारों लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई हैं।
उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में असंतोष और असुरक्षा का माहौल पैदा हुआ है। संगठन का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में प्रशासन को सभी पक्षों को सुनने के बाद ही कोई निर्णय लेना चाहिए था।
प्रदर्शन के बाद संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य सरकार को पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में जामा मस्जिद की सीलिंग प्रक्रिया की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने, सभी पक्षों को सुनकर न्यायपूर्ण समाधान निकालने, धार्मिक स्वतंत्रता एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने, प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच तत्काल संवाद स्थापित करने तथा धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में पारदर्शी और समान नीति लागू करने की मांग की गई है।
नईम कुरैशी ने कहा कि मस्जिद को कथित रूप से नक्शा स्वीकृत न होने के आधार पर सील किया गया है। उन्होंने कहा कि संगठन इस पूरे मामले को गंभीरता से उठा रहा है और प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर उचित विचार नहीं किया गया तो संगठन आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेगा।
फिलहाल इस मामले को लेकर प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन प्रदर्शन के बाद यह मुद्दा अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है। सभी की निगाहें अब प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदम पर टिकी हैं।







