रुद्रप्रयाग: विश्व प्रसिद्ध तुंगनाथ धाम यात्रा मार्ग पर एक तीर्थयात्री द्वारा स्थानीय घोड़ा-खच्चर संचालक के साथ कथित मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। घटना में संचालक के सिर पर गंभीर चोट लगने की सूचना है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में रोष व्याप्त है। लोगों ने प्रशासन से मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए दोषी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, दूसरी ओर चोपता क्षेत्र से भी पर्यटकों की हुड़दंगबाजी का वीडियो सामने आया है, जिसने देवभूमि में पर्यटकों के अनुशासन और कानून व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
जानकारी के अनुसार तुंगनाथ धाम यात्रा मार्ग पर किसी बात को लेकर एक तीर्थयात्री और स्थानीय घोड़ा-खच्चर संचालक के बीच विवाद हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया। आरोप है कि मारपीट के दौरान घोड़ा-खच्चर संचालक के सिर पर गंभीर चोट लगी। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड अपनी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक मूल्यों और अतिथि सत्कार की परंपरा के लिए पूरे देश में जाना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का स्थानीय लोग हमेशा सम्मान करते हैं, लेकिन इसके बदले में स्थानीय संस्कृति और लोगों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की भी अपेक्षा की जाती है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कुछ बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक और यात्री धार्मिक स्थलों की मर्यादा का पालन नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि तुंगनाथ जैसे पवित्र धाम में किसी स्थानीय व्यक्ति के साथ मारपीट की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे क्षेत्र की सामाजिक सद्भावना प्रभावित होती है।
सामाजिक कार्यकर्ता राजेश नेगी ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि चारधाम यात्रा और अन्य धार्मिक यात्राएं श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक अनुभव से जुड़ी होती हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की हिंसा, अभद्र व्यवहार या कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटनाओं के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
राजेश नेगी ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल स्थानीय लोगों की भावनाओं को आहत करती हैं बल्कि उत्तराखंड की छवि और धार्मिक स्थलों की गरिमा को भी प्रभावित करती हैं। प्रशासन को ऐसे मामलों में शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई कर स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि देवभूमि में कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से मांग की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। लोगों का कहना है कि धार्मिक पर्यटन स्थलों पर अनुशासन बनाए रखना प्रशासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
इसी बीच चोपता क्षेत्र से भी पर्यटकों की हुड़दंगबाजी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ युवक वाहनों की छतों पर चढ़कर तेज आवाज में चिल्लाते, शोर-शराबा करते और सार्वजनिक स्थान पर अनुचित व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि वीडियो तुंगनाथ धाम यात्रा मार्ग और चोपता क्षेत्र का है।
वायरल वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि चोपता अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे क्षेत्रों में इस प्रकार की गतिविधियां न केवल अन्य पर्यटकों को असहज करती हैं, बल्कि क्षेत्र की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
स्थानीय व्यापारियों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि उत्तराखंड में आने वाले अधिकांश पर्यटक नियमों का पालन करते हैं, लेकिन कुछ लोगों की गैर-जिम्मेदाराना हरकतें पूरे पर्यटन क्षेत्र की छवि को प्रभावित कर देती हैं। ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई जरूरी है ताकि गलत संदेश न जाए।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने बताया कि तुंगनाथ धाम क्षेत्र में मारपीट और हुड़दंग से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से संज्ञान में आए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक शांति भंग करने, हुड़दंग मचाने या स्थानीय लोगों के साथ अभद्र व्यवहार करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस दोनों मामलों की जांच में जुटी हुई है। स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों का मानना है कि देवभूमि उत्तराखंड की गरिमा, धार्मिक स्थलों की मर्यादा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई बेहद जरूरी है।







