देहरादून: उत्तराखंड में पर्यटन और चारधाम यात्रा सीजन अपने चरम पर है। एक ओर लाखों श्रद्धालु और पर्यटक देवभूमि का रुख कर रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ लोगों की अनुशासनहीन हरकतें पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। धार्मिक स्थलों, पर्यटन नगरीयों और यात्रा मार्गों पर शराबखोरी, हुड़दंग, अभद्रता और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। बीते 24 घंटों के दौरान सामने आई कई घटनाओं ने देवभूमि की मर्यादा, सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उत्तराखंड की पहचान केवल प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन से नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में कुछ पर्यटकों और श्रद्धालुओं की गैर-जिम्मेदाराना हरकतें स्थानीय लोगों की नाराजगी का कारण बन रही हैं। पुलिस प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद ऐसे मामलों में कमी नहीं आ रही है।
मसूरी माल रोड पर शराब के नशे में हंगामा
पहाड़ों की रानी मसूरी में पर्यटन सीजन ने रफ्तार पकड़ ली है। हजारों पर्यटक रोजाना मसूरी और आसपास के पर्यटन स्थलों पर पहुंच रहे हैं। इसी बीच शुक्रवार देर रात माल रोड पर कुछ युवकों द्वारा शराब के नशे में हुड़दंग मचाने का मामला सामने आया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक युवक अर्धनग्न अवस्था में शराब की बोतल हाथ में लेकर वाहन की छत पर खड़ा दिखाई दिया, जबकि उसके साथी तेज आवाज में शोर-शराबा करते रहे। यह घटनाक्रम शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्रों में से एक माल रोड पर हुआ, जहां बड़ी संख्या में परिवार और पर्यटक घूमने आते हैं।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं मसूरी की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं। साथ ही पुलिस की रात्रिकालीन गश्त और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
हरिद्वार में धार्मिक मर्यादा को ठेस
धर्मनगरी हरिद्वार में भी हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों को नाराज कर दिया है। आरोप है कि कुछ पर्यटक शराब के नशे में हरकी पैड़ी क्षेत्र में पहुंचे और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए हंगामा करने लगे।
स्थानीय तीर्थ पुरोहितों के अनुसार युवकों की हालत ऐसी थी कि वे ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। जब उनकी हरकतें बढ़ने लगीं तो स्थानीय लोगों ने उन्हें रोका और घटना का वीडियो बना लिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और सभी युवकों को हिरासत में लेकर थाने ले गई।
इसी तरह शुक्रवार रात हरकी पैड़ी के समीप कुछ पर्यटक आपस में मारपीट करते हुए भी दिखाई दिए। हालांकि बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया, लेकिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
ऋषिकेश में विवाद और बढ़ता तनाव
योग नगरी ऋषिकेश में भी हाल ही में एक मामला काफी चर्चा में रहा। आरोप था कि हरियाणा से आए कुछ पर्यटकों ने एक महिला के साथ अभद्रता और छेड़छाड़ का प्रयास किया। शिकायत के बाद स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए और विवाद बढ़ गया। इस दौरान पर्यटकों के साथ मारपीट और वाहन क्षतिग्रस्त किए जाने की घटनाएं भी सामने आईं।
मामले का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों पर कार्रवाई की। पर्यटकों के साथ मारपीट करने वाले स्थानीय लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया।
वहीं ऋषिकेश के फूलचट्टी क्षेत्र में भी एक महिला पर्यटक का वीडियो सामने आया, जिसमें वह कथित रूप से नशे की हालत में पुलिसकर्मियों से बहस करती दिखाई दी। गंगा तटों पर शराब सेवन और अनुशासनहीनता की घटनाओं को लेकर स्थानीय लोग लगातार चिंता जता रहे हैं।
चारधाम यात्रा मार्गों पर भी बढ़ रही घटनाएं
चारधाम यात्रा मार्गों पर भी अनुशासनहीनता के मामले सामने आने लगे हैं। हाल ही में चमोली जिले के पीपलकोटी क्षेत्र में हरियाणा नंबर की एक कार नो-पार्किंग जोन में खड़ी मिली। वाहन में सवार युवक तेज आवाज में संगीत बजाकर हंगामा कर रहे थे।
संयोग से उस समय चमोली पुलिस अधीक्षक क्षेत्र भ्रमण पर थे। मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए पांच युवकों को गिरफ्तार किया गया और वाहन को सीज कर दिया गया।
चमोली पुलिस का कहना है कि देवभूमि में आने वाले पर्यटकों का स्वागत है, लेकिन अनुशासनहीनता और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ऑपरेशन प्रहार के तहत सख्त कार्रवाई
चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने “ऑपरेशन प्रहार” अभियान शुरू किया है। इसके तहत हरिद्वार, ऋषिकेश, बदरीनाथ, जोशीमठ, गोविंदघाट, रुद्रप्रयाग, चमोली और देहरादून समेत कई धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
अभियान के तहत रेस ड्राइविंग, ड्रंक एंड ड्राइव, संदिग्ध नंबर प्लेट, बिना नंबर प्लेट, हुटर और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस आंकड़ों के अनुसार ऑपरेशन प्रहार के तहत अब तक 4,214 वाहनों के चालान किए जा चुके हैं। 734 वाहन सीज किए गए हैं और 138 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा हरिद्वार में शांति व्यवस्था भंग करने और अन्य मामलों में 383 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
केदारघाटी में अवैध शराब और नशे के खिलाफ अभियान
रुद्रप्रयाग और केदारघाटी क्षेत्र में भी पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। आबकारी अधिनियम के तहत 18 मुकदमे दर्ज किए गए हैं और 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 917.5 बोतल अवैध शराब बरामद की है। साथ ही शराब तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे पांच वाहनों को भी सीज किया गया है। बरामद शराब और जब्त वाहनों की अनुमानित कीमत करीब 5.50 लाख रुपये बताई जा रही है।
यात्रा सीजन के दौरान ओवरस्पीडिंग, ओवरलोडिंग, बिना हेलमेट और बिना सीट बेल्ट वाहन चलाने वालों के खिलाफ भी लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 2,814 वाहनों के चालान किए जा चुके हैं और 13.31 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया है।
स्थानीय लोगों की बढ़ती चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन और यात्रा सीजन के दौरान बढ़ती भीड़ और कुछ लोगों की अनुशासनहीनता के कारण आम नागरिकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में जाम, शोर-शराबा और कानून व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो रही है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि पर्यटन और तीर्थाटन का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन देवभूमि की संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मर्यादाओं का सम्मान भी उतना ही आवश्यक है।
आस्था और अनुशासन का संतुलन जरूरी
उत्तराखंड आने वाले करोड़ों श्रद्धालु और पर्यटक राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। होटल, परिवहन, व्यापार और स्थानीय रोजगार पर पर्यटन का सीधा प्रभाव पड़ता है। लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि धार्मिक स्थलों और पर्यटन क्षेत्रों की गरिमा बनी रहे।
प्रशासन के सामने चुनौती केवल भीड़ प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक मर्यादाओं की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानूनी कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए पर्यटकों और श्रद्धालुओं में भी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की भावना विकसित करना आवश्यक है।
देवभूमि उत्तराखंड अपनी संस्कृति, आध्यात्मिक पहचान और अतिथि सत्कार के लिए जानी जाती है। ऐसे में यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह इस पवित्र भूमि की परंपराओं, धार्मिक भावनाओं और सामाजिक मूल्यों का सम्मान करे, ताकि पर्यटन और आस्था का यह संतुलन भविष्य में भी कायम रह सके।







