रुद्रप्रयाग: केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामपुर बाजार के समीप स्थित संवेदनशील भू-धंसाव क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से किए गए सुरक्षा कार्य पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गए हैं। जून माह की शुरुआती बारिश ने सुरक्षा कार्यों की गुणवत्ता की पोल खोल दी है। सड़क किनारे मिट्टी धंसने से हाल ही में लगाया गया क्रेट वायर क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे क्षेत्र में एक बार फिर भू-धंसाव का खतरा बढ़ गया है। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार रामपुर बाजार के समीप यह क्षेत्र पिछले दो वर्षों से भू-धंसाव की समस्या से जूझ रहा है। यात्रियों और स्थानीय आबादी की सुरक्षा को देखते हुए यहां करोड़ों रुपये की लागत से सुरक्षा दीवारों और क्रेट वायर संरचनाओं का निर्माण कराया गया था। हाल ही में मार्च और अप्रैल माह में भी सुरक्षा कार्यों को मजबूती देने के लिए नए निर्माण किए गए थे, लेकिन पहली ही बारिश में इन संरचनाओं का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।
बारिश के दौरान सड़क किनारे की मिट्टी धंसने लगी, जिससे क्रेट वायर संरचना भी ढह गई। उस समय सड़क के किनारे कुछ वाहन खड़े थे। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, हालांकि कई वाहनों के पहिए मिट्टी में धंस गए थे। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने समय रहते वाहनों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया, जिससे बड़ा नुकसान टल गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सुरक्षा कार्य टिकाऊ साबित नहीं हो रहे हैं। उनका कहना है कि एक वर्ष पहले नदी किनारे बनाई गई सुरक्षा दीवार भी पहली ही बरसात में क्षतिग्रस्त हो गई थी और अब हाल ही में किए गए कार्यों का भी वही हाल हो गया है। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पूर्व ग्राम प्रधान न्यालसू प्रमोद सिंह रावत ने कहा कि सरकार सुरक्षा कार्यों के लिए लगातार धनराशि स्वीकृत कर रही है, लेकिन संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं की लापरवाही के कारण जनता को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी और स्थायी समाधान नहीं किया गया तो भू-धंसाव का दायरा बढ़कर मुख्य केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच सकता है, जिससे यात्रा मार्ग और स्थानीय यातायात दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
स्थानीय व्यवसायी संदीप सिंह रावत ने भी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि हाल ही में किए गए सुरक्षा कार्यों का पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो जाना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कार्य टिकाऊ क्यों नहीं साबित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले मानसून में रामपुर बाजार और केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भू-धंसाव का खतरा और अधिक बढ़ सकता है। इससे न केवल स्थानीय लोगों बल्कि केदारनाथ यात्रा पर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
वहीं मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एनएच विभाग के अधिशासी अभियंता ओंकार पांडे ने बताया कि क्षतिग्रस्त हिस्से का निरीक्षण कर लिया गया है। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक उपचारात्मक और मरम्मत कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मानसून की शुरुआत के साथ ही रामपुर भू-धंसाव जोन में सामने आई यह घटना एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या स्थायी समाधान निकालते हैं।







