मसूरी में कूड़े के ढेर में लगी भीषण आग, पांच घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन; कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर के आइडियाज बिल्डिंग के समीप बड़ी मात्रा में एकत्रित सूखे कूड़े के ढेर में देर रात अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे इलाके में धुएं का घना गुबार फैल गया। आग की लपटों और धुएं से आसपास के लोगों में दहशत फैल गई तथा क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार देर रात क्षेत्र में रहने वाले एक स्थानीय निवासी ने कूड़े के ढेर से उठती आग की लपटें और धुआं देखा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तत्काल मसूरी पुलिस और अग्निशमन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंच गईं, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि उस पर काबू पाने में करीब पांच घंटे का समय लग गया।

रातभर चला राहत और बचाव अभियान

दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार आग केवल कूड़े के ऊपरी हिस्से तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह ढेर के भीतर तक फैल चुकी थी। यही वजह रही कि आग बार-बार सुलगकर भड़क रही थी और उसे बुझाना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। दमकल कर्मियों ने लगातार पानी की बौछारें कर आग को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन कूड़े के अंदर धधक रही आग के कारण अभियान लंबा खिंच गया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तीन फायर टेंडरों को मौके पर लगाया गया। वहीं मसूरी नगर पालिका की स्वच्छता टीम ने भी राहत कार्य में सहयोग किया। जेसीबी मशीन की मदद से कूड़े के ढेर को हटाकर अलग-अलग किया गया ताकि आग के स्रोत तक पहुंचा जा सके। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया।

पानी की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती

अग्निशमन विभाग के प्रभारी धीरज तड़ियाल ने बताया कि आग बुझाने के दौरान सबसे बड़ी समस्या पानी की उपलब्धता रही। उन्होंने कहा कि घटनास्थल के आसपास फायर हाइड्रेंट या पर्याप्त जल स्रोत मौजूद नहीं थे, जिसके चलते दमकल वाहनों को बार-बार नजदीकी जल स्रोतों तक जाकर पानी भरना पड़ा।

धीरज तड़ियाल ने बताया कि यदि घटनास्थल के आसपास पर्याप्त जलापूर्ति की व्यवस्था होती तो आग पर कहीं अधिक तेजी से काबू पाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना आवश्यक है।

खुले में जमा कूड़े पर उठे सवाल

घटना के बाद अग्निशमन विभाग ने खुले स्थान पर बड़ी मात्रा में जमा किए गए सूखे और ज्वलनशील कूड़े पर भी चिंता जताई है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का कचरा किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है। खासकर गर्मियों के मौसम में सूखा कूड़ा आग पकड़ने के लिए बेहद संवेदनशील होता है।

अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस मामले को नगर पालिका प्रशासन के समक्ष उठाया जाएगा और भविष्य में कूड़ा निस्तारण की बेहतर एवं वैज्ञानिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की जाएगी।

बड़ा हादसा टला, परिवार सुरक्षित

घटनास्थल के बिल्कुल नजदीक एक व्यक्ति अपने परिवार के साथ निवास करता है। आग की भयावहता को देखते हुए स्थानीय लोगों को आशंका थी कि कहीं आग आसपास के मकानों तक न पहुंच जाए। यदि ऐसा होता तो बड़ा नुकसान हो सकता था।

हालांकि दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई और लगातार प्रयासों के कारण आग को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। इससे आसपास के मकानों और वहां रहने वाले परिवारों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ और एक संभावित बड़ा हादसा टल गया।

आग लगने के कारणों की जांच जारी

फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार किसी चिंगारी, जलते पदार्थ या अन्य स्रोत के संपर्क में आने से सूखे कूड़े में आग लगी हो सकती है। हालांकि वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस और अग्निशमन विभाग द्वारा जांच की जा रही है।

स्वच्छता व्यवस्था पर फिर खड़े हुए सवाल

इस घटना ने एक बार फिर मसूरी की कूड़ा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था की पोल खोल दी है। पर्यटन सीजन के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने से शहर में कूड़े की मात्रा बढ़ जाती है, लेकिन उसके वैज्ञानिक निस्तारण और सुरक्षित प्रबंधन को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मसूरी की पहचान देश-विदेश में एक स्वच्छ और सुंदर पर्यटन नगरी के रूप में है, लेकिन जगह-जगह जमा कूड़े के ढेर और उनसे उत्पन्न होने वाले खतरे शहर की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से कूड़ा निस्तारण की स्थायी, सुरक्षित और वैज्ञानिक व्यवस्था लागू करने की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

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