पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। धारचूला क्षेत्र के जुम्मा गांव में रेबीज का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बीडी पांडे जिला अस्पताल में भर्ती आठवीं कक्षा के छात्र युवराज सिंह धामी की इलाज के दौरान मौत हो गई। जिले में बीते 20 दिनों के भीतर रेबीज से यह दूसरी मौत है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दोनों मृतक किशोरों को एक ही लावारिस श्वान के बच्चे ने काटा था।
दूसरी मौत के बाद जुम्मा गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग उन लोगों की निगरानी कर रहा है जिन्हें उक्त श्वान ने काटा था।
अस्पताल में जिंदगी की जंग हार गया युवराज
जानकारी के अनुसार, धारचूला के जुम्मा गांव निवासी 14 वर्षीय युवराज सिंह धामी, पुत्र रवीन्द्र सिंह धामी, को कुछ दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक युवराज में रेबीज के लक्षण लगातार दिखाई दे रहे थे।
कभी उसका व्यवहार सामान्य हो जाता था तो कभी अचानक उसमें रेबीज के गंभीर लक्षण उभरने लगते थे। चिकित्सकों ने उसकी स्थिति को देखते हुए विशेष निगरानी में रखा और संक्रमण की पुष्टि के लिए सैंपल जांच हेतु दिल्ली भेजे गए।
संक्रमण के खतरे और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए युवराज को जिला अस्पताल के आईसीयू में आइसोलेट किया गया था। डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी कर रहे थे, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी और इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
20 दिन पहले भी गई थी एक किशोर की जान
यह घटना जिले में रेबीज से हुई दूसरी मौत है। इससे पहले 23 मई को भी जुम्मा गांव के एक किशोर की रेबीज से मौत हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि करीब छह महीने पहले गांव के बुंगा और टीलम तोक क्षेत्र में एक लावारिस श्वान के बच्चे ने कई ग्रामीणों और बच्चों को काट लिया था।
कुछ समय बाद उस श्वान की भी मौत हो गई थी। लेकिन उसके काटे गए लोगों में धीरे-धीरे रेबीज के लक्षण सामने आने लगे।
23 मई को गांव के एक किशोर की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां जांच के दौरान उसके रेबीज संक्रमित होने की पुष्टि हुई। हालत गंभीर होने के कारण उपचार शुरू किया गया, लेकिन अगले ही दिन उसकी मौत हो गई थी।
हवा-पानी से लगने लगा डर, बढ़ी आक्रामकता
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बीते दिनों युवराज सिंह धामी की तबीयत भी अचानक बिगड़ने लगी। परिजनों ने बताया कि उसे पानी और हवा से डर लगने लगा था। इसके साथ ही उसका व्यवहार भी आक्रामक होता जा रहा था।
रेबीज के ये लक्षण सामने आने के बाद परिवार के लोग उसे तत्काल स्थानीय अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने उसकी स्थिति का परीक्षण किया और रेबीज संक्रमण की पुष्टि होने पर उसे आईसीयू में भर्ती कर लिया। लेकिन करीब 16 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद युवराज ने दम तोड़ दिया।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, संदिग्धों पर नजर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) पिथौरागढ़ डॉ. एसएस नबियाल ने किशोर की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि उसकी मौत रेबीज संक्रमण के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि जिन अन्य लोगों को उक्त श्वान ने काटा था, उन सभी की निगरानी की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में लगातार संपर्क बनाए हुए है और संदिग्ध लोगों की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर उन्हें चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
गांव में दहशत का माहौल
लगातार दो किशोरों की मौत के बाद जुम्मा गांव में भय और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस लावारिस श्वान के बच्चे ने लोगों को काटा था, उसने करीब दस लोगों को अपना शिकार बनाया था। अब दो बच्चों की मौत के बाद बाकी परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है।
ग्रामीण प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से गांव में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने, प्रभावित लोगों की नियमित जांच कराने और रेबीज के प्रति जागरूकता अभियान चलाने की मांग कर रहे हैं।
रेबीज के प्रति जागरूक रहने की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज एक घातक वायरल संक्रमण है, जिसके लक्षण सामने आने के बाद मरीज को बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता, बंदर या अन्य संदिग्ध जानवर काट ले तो तत्काल एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जानवर के काटने की घटना को हल्के में न लें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर उपचार प्राप्त करें।
पिथौरागढ़ के जुम्मा गांव में हुई इन दो दुखद मौतों ने एक बार फिर रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। वहीं, युवराज और मोहित की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।







