उत्तराखंड में मौसम का कहर जारी: 7 जिलों में बारिश-तूफान का अलर्ट, ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की चेतावनी

देहरादून: उत्तराखंड में मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ है। प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। इसी बीच मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने एक बार फिर राज्य के कई जिलों के लिए बारिश, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने सात जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और झोंकेदार हवाओं की संभावना जताते हुए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, 4200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की भी संभावना व्यक्त की गई है।

मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में आज मौसम खराब रहने की संभावना है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश होने के साथ-साथ 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले क्षेत्रों में न जाने की अपील की है।

ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार

मौसम विभाग का कहना है कि राज्य के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से 4200 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना जताई गई है। जून माह में बर्फबारी की संभावना ने पर्वतीय क्षेत्रों में ठंड बढ़ने के संकेत दिए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण प्रदेश के मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों को मौसम के ताजा अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

तीन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग ने रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके अलावा राज्य के अन्य जनपदों में भी गरज-चमक के साथ तेज बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।

संभावित खराब मौसम को देखते हुए येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे न जाने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सावधानी बरतने और मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

रुद्रप्रयाग में अतिवृष्टि से नुकसान

इधर, मौसम की मार रुद्रप्रयाग जिले में देखने को मिली है। बुधवार शाम जखोली क्षेत्र के खलियाण बांगर और पुजार गांव में हुई अतिवृष्टि से कई स्थानों पर नुकसान हुआ। भारी बारिश के बाद गदेरों में अचानक उफान आ गया, जिससे मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। चौकी जखोली पुलिस ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया।

घरों और कृषि भूमि को पहुंचा नुकसान

पुजार गांव के दोनों ओर स्थित बलिहारी और रौण्ड गदेरों में तेज बहाव के साथ आए मलबे और पत्थरों से स्थानीय निवासी रामचंद्र भट्ट और प्रकाश भट्ट के घरों के आंगन मलबे से भर गए। वहीं बुरांश गदेरे में आए उफान से खिलानंद भट्ट, राकेश भट्ट और सतीश भट्ट की कृषि भूमि का हिस्सा बह गया।

इसके अलावा भानु प्रसाद भट्ट की गौशाला के पीछे भी बड़े-बड़े बोल्डर जमा हो गए, जिससे नुकसान की स्थिति उत्पन्न हो गई। खलियाण गांव में रामचंद्र भट्ट की पुस्तक भंडार एवं प्रोविजन स्टोर के पीछे भी भारी मात्रा में मलबा और पत्थर जमा हो गए, जिससे संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।

दो पुलियाएं क्षतिग्रस्त, सड़कें हुईं बंद

अतिवृष्टि के कारण बुरांश गदेरे पर बनी दो पुलियाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। वहीं जखोली-बधानीताल मोटर मार्ग और पुजारगांव-कुरछौला सड़क मार्ग पर भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर आने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

स्थानीय प्रशासन द्वारा सड़कों से मलबा हटाने और यातायात बहाल करने के प्रयास जारी हैं। प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

जनहानि नहीं, लेकिन खतरा बरकरार

हालांकि राहत की बात यह रही कि इस प्राकृतिक आपदा में किसी प्रकार की जनहानि या पशुहानि नहीं हुई है। समय रहते लोगों के सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाने से बड़ा हादसा टल गया। बावजूद इसके मौसम विभाग और प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

प्रदेश में मानसून पूर्व सक्रिय मौसम के चलते अगले कुछ दिनों तक बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, यात्रियों और चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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