रुद्रप्रयाग: नगरासू स्थित गुरुद्वारे को लेकर शुरू हुआ विवाद 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सुलझ नहीं पाया है। गुरुद्वारे की छत पर कुछ निहंग सिखों के डटे रहने से क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। प्रशासन लगातार वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। इस बीच गुरुद्वारा संचालक बेहंत सिंह ने पत्रकार वार्ता कर पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा।
किसी मान्यता प्राप्त संगठन से जुड़े नहीं हैं छत पर मौजूद निहंग: बेहंत सिंह
गुरुद्वारा संचालक बेहंत सिंह का दावा है कि गुरुद्वारे की छत पर मौजूद निहंग सिख किसी मान्यता प्राप्त समिति या पंजीकृत संगठन से जुड़े नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक निहंग सिख आमतौर पर संगठित और पंजीकृत संस्थाओं से जुड़े होते हैं, जबकि वर्तमान में छत पर मौजूद लोगों की गतिविधियों से श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के बीच भय और असमंजस का वातावरण पैदा हो रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों की वजह से गुरुद्वारे का सामान्य संचालन प्रभावित हो रहा है और श्रद्धालुओं को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
60 वर्षीय श्रद्धालु को रोककर रखने का आरोप
गुरुद्वारा प्रबंधन ने आरोप लगाया है कि छत पर मौजूद लोगों ने एक लगभग 60 वर्षीय श्रद्धालु को अपने साथ रोके रखा हुआ है, जिससे उनके परिजनों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि प्रबंधन का दावा है कि एक अन्य युवक को उनके कब्जे से छुड़ा लिया गया है।
बेहंत सिंह ने बताया कि पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने भी फोन के माध्यम से छत पर मौजूद लोगों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और नीचे उतरने को तैयार नहीं हैं।
कर्णप्रयाग मामले में गिरफ्तार निहंगों की रिहाई की मांग
जानकारी के अनुसार, छत पर मौजूद लोगों की प्रमुख मांगों में 16 जून को कर्णप्रयाग में हुए विवाद के बाद जेल भेजे गए तीन निहंग सिखों की रिहाई भी शामिल है। प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से वार्ता के जरिए समाधान का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल गतिरोध बना हुआ है।
सोलर सिस्टम में तोड़फोड़ और पानी की सप्लाई रोकने का आरोप
गुरुद्वारा संचालक ने आरोप लगाया कि छत पर मौजूद लोगों ने सोलर सिस्टम में तोड़फोड़ की है और पानी की सप्लाई भी रोक दी है, जिससे गुरुद्वारे में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि जब उनसे फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
बेहंत सिंह के अनुसार, “पहले चार लोग दो बाइकों पर आए और बाद में तीन अन्य लोग पैदल पहुंचे। आते ही उन्होंने हमारे सेवादारों से विवाद शुरू कर दिया। जब उन्हें रोकने की कोशिश की गई तो वे अपशब्द कहने लगे। उनके साथ एक ऐसा युवक भी था जो निहंग वेशभूषा में नहीं था और वही सबसे अधिक उत्तेजक भाषा का इस्तेमाल कर रहा था।”
पुलिस बुलाने के संदेह में छत पर पहुंचे
बेहंत सिंह ने बताया कि माहौल खराब न हो, इसके लिए उन्हें वहां से जाने को कहा गया था, लेकिन वे नहीं माने। बाद में जब वे बाहर निकले तो वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को देखकर उन्हें लगा कि उन्हें पकड़वाने के लिए पुलिस बुलाई गई है। इसी आशंका के चलते वे भागते हुए गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और तब से वहीं डटे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि छत पर मौजूद लोग लगातार तोड़फोड़ कर रहे हैं और व्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन की बढ़ी चुनौती
गौरतलब है कि 16 जून को कर्णप्रयाग में हुए विवाद के बाद से ही पूरे क्षेत्र में माहौल संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में नगरासू गुरुद्वारा विवाद ने प्रशासन की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। गुरुद्वारे के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
चारधाम यात्रा मार्ग से सटे नगरासू में चल रहे इस घटनाक्रम पर पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं। प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए लगातार वार्ता और समझाइश का सहारा ले रहा है।
स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता
लंबे समय से चले आ रहे इस गतिरोध को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है तथा जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाना चाहिए।
फिलहाल प्रशासन, पुलिस और गुरुद्वारा प्रबंधन मिलकर स्थिति को सामान्य करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद गतिरोध कायम रहने से मामला लगातार गंभीर बना हुआ है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वार्ता के जरिए इस विवाद का समाधान कब और कैसे निकलता है।






