अल्मोड़ा: सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में पंचमी के शुभ अवसर पर कुमाऊं के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मां नंदा देवी मेले का भव्य शुभारंभ हो गया। वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक रीति-रिवाजों और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच मेले का विधिवत आगाज हुआ। सुबह से ही श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में उमड़ती रही। देर रात तक चले सांस्कृतिक आयोजनों ने पूरे नगर को भक्ति और उत्सव के रंग में रंग दिया।
केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने किया शुभारंभ
ऐतिहासिक नंदा देवी मेला परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह का शुभारंभ केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने प्रदेशवासियों के साथ देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं को नंदा देवी मेले की शुभकामनाएं दीं।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मां नंदा देवी केवल कुमाऊं ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की आराध्य देवी और कुलदेवी हैं। हिमालय की बेटी के रूप में पूजी जाने वाली मां नंदा के प्रति लोगों की अटूट आस्था है। यही वजह है कि दूर-दराज क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु हर वर्ष अल्मोड़ा पहुंचकर देवी के दर्शन करते हैं।
उन्होंने कहा कि नंदा देवी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और गौरव का प्रतीक है। मेले के दौरान निकलने वाली शोभायात्रा और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा नगर मां नंदा के जयकारों से गूंज उठता है।
विधायक मनोज तिवारी ने दी शुभकामनाएं
समारोह में विशिष्ट अतिथि और स्थानीय विधायक मनोज तिवारी ने भी श्रद्धालुओं को नंदा देवी महोत्सव की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में रहने वाले लोगों की भी मां नंदा देवी के प्रति गहरी आस्था है।
उन्होंने नंदा देवी मंदिर को क्षेत्र की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर बताते हुए कहा कि यह मेला पीढ़ियों से लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
पूजा-अर्चना के साथ सुख-समृद्धि की कामना
उद्घाटन समारोह के दौरान चंद्र वंशज नरेंद्र चंद्र राज सिंह ने मां नंदा देवी की विशेष पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर शुरू हुआ, जिसमें डी शेडो समूह सहित कई स्थानीय सांस्कृतिक दलों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।
झोड़ा-छपेली ने बांधा समां
मेले के उद्घाटन के बाद आयोजित सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने कुमाऊं की पारंपरिक लोक संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया। झोड़ा, छपेली और अन्य लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे।
लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने न केवल स्थानीय संस्कृति को प्रदर्शित किया, बल्कि बाहर से आए पर्यटकों को भी कुमाऊं की समृद्ध लोक परंपराओं से रूबरू कराया।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे गणमान्य लोग
उद्घाटन समारोह में मेयर अजय वर्मा, पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान, कैलाश शर्मा, पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, शोभा जोशी, दायित्वधारी कुंदन लटवाल, गोविंद पिलख्वाल, गंगा बिष्ट, एडीएम संजय कुमार, मंदिर समिति अध्यक्ष मनोज वर्मा, सचिव मनोज सनवाल, मुख्य सांस्कृतिक संयोजक अर्जुन सिंह बिष्ट, मेला मुख्य संयोजक ताराचंद्र जोशी, अनूप साह, हरीश बिष्ट सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
आज कदली वृक्षों को दिया जाएगा निमंत्रण
नंदा देवी मेले की परंपराओं के तहत गुरुवार शाम चार बजे नंदा देवी मंदिर परिसर से मंदिर के पुजारी और श्रद्धालुओं का एक दल जगरियों के साथ लक्ष्मेश्वर स्थित खुटकुड़ी भैरव मंदिर के लिए रवाना होगा।
यहां विधि-विधान के साथ कदली वृक्षों की पूजा-अर्चना की जाएगी और उन्हें मेले में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा। इसके बाद शुक्रवार सुबह कदली वृक्षों की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो नगर के प्रमुख बाजारों से होकर नंदा देवी मंदिर परिसर पहुंचेगी।
आस्था, संस्कृति और परंपरा का संगम
अल्मोड़ा का ऐतिहासिक नंदा देवी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कुमाऊं की लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस मेले में शामिल होकर मां नंदा देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने का अवसर पाते हैं।
मेले के शुभारंभ के साथ ही पूरे अल्मोड़ा में उत्सव का माहौल है और आगामी दिनों में विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रमों के आयोजन से यह ऐतिहासिक मेला और भी रंगारंग होने वाला है।







