मसूरी के ट्रैफिक जाम से निपटने को सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, 800 नई पार्किंग स्थलों की पहचान

देहरादून: पहाड़ों की रानी मसूरी में बढ़ता ट्रैफिक जाम प्रशासन के लिए लगातार बड़ी चुनौती बना हुआ है। पर्यटन सीजन के दौरान शहर की सड़कें घंटों तक जाम से जूझती हैं, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अब इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में राज्य सरकार ने सक्रिय कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। गृह सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मसूरी की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं और एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है।

मसूरी उत्तराखंड का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जहां हर वर्ष लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। गर्मियों और अवकाश के मौसम में पर्यटकों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, जिससे शहर की सीमित क्षमता पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। वर्तमान में मसूरी की स्थायी आबादी लगभग 40 हजार है, लेकिन पर्यटन सीजन में यह संख्या लगभग दोगुनी हो जाती है। ऐसे में सड़कें, पार्किंग स्थल और अन्य बुनियादी सुविधाएं दबाव में आ जाती हैं, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या विकराल रूप ले लेती है।

आंकड़ों के अनुसार मसूरी में होटल, होमस्टे और अन्य आवासीय इकाइयों को मिलाकर लगभग 7,800 कमरे उपलब्ध हैं। पीक सीजन में ये सभी कमरे भर जाते हैं और कई बार पर्यटकों को ठहरने के लिए जगह तक नहीं मिलती। इससे साफ है कि शहर अपनी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक पर्यटकों का दबाव झेल रहा है।

पार्किंग की कमी बनी बड़ी वजह

पार्किंग की कमी भी ट्रैफिक जाम की बड़ी वजह बन रही है। वर्तमान में मसूरी में लगभग 4,000 वाहनों की पार्किंग क्षमता है, जबकि पर्यटन सीजन में 6,000 से 7,000 तक वाहन शहर में प्रवेश करते हैं। पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण वाहन सड़क किनारे खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और जाम की स्थिति पैदा हो जाती है।

चारधाम यात्रा वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट

गृह सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस समस्या के समाधान के लिए कई अहम फैसले लिए गए। सबसे महत्वपूर्ण निर्णय चारधाम यात्रा से जुड़े वाहनों के रूट को लेकर लिया गया। प्रशासन अब गंगोत्री और यमुनोत्री धाम जाने वाले वाहनों को मसूरी मार्ग से गुजरने के बजाय विकासनगर मार्ग का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। माना जा रहा है कि इससे मसूरी पर यातायात का दबाव काफी हद तक कम होगा।

बैठक में कमर्शियल दोपहिया वाहनों के संचालन को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। तय किया गया कि ऐसे वाहनों को केवल निर्धारित स्थलों पर ही पार्किंग की अनुमति होगी। साथ ही कमर्शियल टू-व्हीलर लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को भी नियंत्रित किया जाएगा, ताकि अनावश्यक रूप से वाहनों की संख्या न बढ़े।

800 नई पार्किंग स्थलों की पहचान

पार्किंग संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने करीब 800 खाली भूमि चिन्हित की हैं, जहां भविष्य में पार्किंग सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इन जमीनों को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। पहले चरण में उन स्थानों पर पार्किंग विकसित की जाएगी, जहां बिना किसी अतिरिक्त निर्माण कार्य के तत्काल व्यवस्था शुरू की जा सकती है। दूसरे चरण में उन स्थानों पर कार्य होगा, जहां कुछ बुनियादी विकास कार्यों की आवश्यकता है। वहीं जिन भूमि क्षेत्रों के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति जरूरी होगी, उनके लिए आवश्यक प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

एमडीडीए बनेगा नोडल एजेंसी

बैठक में यह भी तय किया गया कि पार्किंग विकास से जुड़े कार्यों के लिए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। शहरी विकास विभाग की पार्किंग नीति के अनुरूप योजनाओं को लागू किया जाएगा। साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से भी नई पार्किंग सुविधाएं विकसित करने पर सहमति बनी है।

यात्रा सीजन के दौरान वाहनों की निगरानी और बेहतर प्रबंधन के लिए परिवहन विभाग और पुलिस के बीच समन्वय बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया है। इसके तहत आरटीओ कार्यालय यात्रा से जुड़े वाहनों का डेटा पुलिस विभाग के साथ साझा करेगा, जिससे वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया जा सकेगा।

संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी राहुल आनंद ने कहा कि मसूरी में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है और बैठक में लिए गए निर्णयों को जल्द धरातल पर उतारा जाएगा।

प्रशासन का मानना है कि पार्किंग क्षमता बढ़ाने, वाहनों की संख्या को नियंत्रित करने और वैकल्पिक मार्गों के उपयोग को बढ़ावा देने जैसे उपायों से मसूरी में ट्रैफिक जाम की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। हालांकि चुनौती पूरी तरह समाप्त नहीं होगी, लेकिन इन प्रयासों से शहर की यातायात व्यवस्था में निश्चित रूप से सुधार आने की उम्मीद है।

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