नैनीताल/देहरादून: उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों और उपक्रमों में वर्षों से सेवाएं दे रहे संविदा, उपनल और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। हाईकोर्ट ने समान कार्य और समान जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों के लिए समान वेतन के सिद्धांत को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। इस फैसले को लंबे समय से नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और सेवा सुविधाओं की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा है।
कर्मचारियों की ओर से मजबूत पैरवी
मामले में कर्मचारियों का पक्ष अधिवक्ता विवेक कठैत ने रखा। उन्होंने अदालत के समक्ष संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित समानता के अधिकार और अनुच्छेद 39(घ) में दिए गए समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत का हवाला देते हुए अपनी दलीलें पेश कीं।
अधिवक्ता की ओर से तर्क दिया गया कि संविदा, आउटसोर्स और अन्य अस्थायी व्यवस्था के तहत कार्यरत कर्मचारी भी कई मामलों में नियमित कर्मचारियों के समान जिम्मेदारियों और दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में समान कार्य के बावजूद लंबे समय तक कम मानदेय दिया जाना समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।
समान काम, समान वेतन पर जोर
अदालत के समक्ष रखी गई दलीलों के बाद कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत का लाभ देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्देश सामने आए हैं। समान पद और समान दायित्व निभाने वाले कर्मचारियों के वेतन और मानदेय को लेकर न्यायालय की व्यवस्था को कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
फैसले में सेवा सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। हालांकि आदेश का वास्तविक प्रभाव संबंधित विभागों और कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रकृति तथा न्यायालय के आदेश की विस्तृत शर्तों के अनुसार तय होगा।
कर्मचारी संगठनों में खुशी
फैसले के बाद प्रदेशभर में कर्मचारी संगठनों के बीच उत्साह का माहौल है। कर्मचारी संगठनों ने इसे अपने लंबे संघर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। संगठनों ने अधिवक्ता विवेक कठैत की कानूनी पैरवी की सराहना करते हुए उनका आभार जताया।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान कार्य करने के बावजूद वेतन और सेवा सुविधाओं में अंतर का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में हाईकोर्ट का यह निर्णय उनके लिए उम्मीद की बड़ी किरण है।
सरकार से जल्द अमल की मांग
कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि हाईकोर्ट के आदेश का जल्द संज्ञान लिया जाए और न्यायालय के निर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग न्यायालय के आदेश के अनुपालन में क्या कदम उठाते हैं और इसका लाभ प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत संविदा, उपनल और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों तक किस तरह पहुंचता है।







