उत्तरकाशी: बरसात का मौसम उत्तरकाशी के नगर पालिका क्षेत्र समेत आसपास के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों के लिए मुश्किलें बढ़ा देता है। सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है, जब किसी परिवार में मौत होने पर अंतिम संस्कार के लिए शवयात्रा को उफनती माल गाड़ नदी पार कर मुक्तिधाम तक पहुंचना पड़ता है। वर्ष 2021 की आपदा में बहा आरसीसी पुल पांच साल बाद भी दोबारा नहीं बन पाया है। पुल के अभाव में अब ग्रामीणों को शवयात्रा तक के दौरान जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है।
2021 की आपदा में बह गया था पुल
माल गाड़ नदी पर बना आरसीसी पुल नगर पालिका क्षेत्र के साथ रामा-कमल सिरांई, जेसाण थोक और आसपास के कई गांवों को मुख्य मुक्तिधाम से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग था। वर्ष 2021 की आपदा में नदी के तेज बहाव में यह पुल बह गया था। इसके बाद से क्षेत्र के लोगों के सामने आवागमन का संकट बना हुआ है।
सामान्य दिनों में ग्रामीण किसी तरह नदी पार कर मुक्तिधाम तक पहुंच जाते हैं, लेकिन बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण यहां से गुजरना बेहद जोखिम भरा हो जाता है।
शव को नदी के तेज बहाव के बीच से पार कराने की मजबूरी
ग्रामीणों के मुताबिक, अंतिम संस्कार के लिए जब शवयात्रा माल गाड़ नदी के किनारे पहुंचती है तो सबसे बड़ी चुनौती सामने आती है। पुल नहीं होने के कारण कई बार चार-पांच लोगों को मिलकर सावधानीपूर्वक शव को नदी के तेज बहाव के बीच से पार कराना पड़ता है।
ग्रामीण हुकमत सिंह, धनवीर सिंह, श्रावण सिंह, मुकेश सिंह और अमीन सिंह का कहना है कि इस दौरान पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने पर बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद सुरक्षित रास्ता नहीं होने के कारण लोगों के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
डेढ़ दर्जन से अधिक गांव प्रभावित
पुल के नहीं होने का असर खलाड़ी, सरमाली, पुजेली, चपटाड़ी, नेत्री, सल्ला, चालनी, करड़ा समेत डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल सिर्फ आवागमन का साधन नहीं था, बल्कि क्षेत्र के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और मुक्तिधाम तक पहुंचने का प्रमुख माध्यम था।
बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन के साथ-साथ आपात स्थिति में भी भारी जोखिम उठाना पड़ता है।
‘पुल निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा’
ग्रामीणों की समस्या को लेकर एसडीएम मुकेश रमोला ने कहा कि पुल निर्माण की मांग प्रशासन के संज्ञान में है। उन्होंने बताया कि पुल के पुनर्निर्माण को लेकर संबंधित विभाग से रिपोर्ट मांगी जाएगी और विभागीय अधिकारियों से समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
एसडीएम ने कहा कि पुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। ग्रामीणों की समस्या के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
कई बार दे चुके हैं ज्ञापन, फिर भी नहीं बनी बात
सामाजिक कार्यकर्ता बलदेव रावत के नेतृत्व में ग्रामीण कई बार जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन देकर माल गाड़ नदी पर पुल के पुनर्निर्माण की मांग कर चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार आश्वासन तो मिला, लेकिन अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
क्षेत्रवासियों ने शासन और प्रशासन से माल गाड़ नदी पर जल्द से जल्द आरसीसी पुल का निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्य के लिए लोगों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते पुल का निर्माण नहीं कराया गया तो बरसात के दौरान किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहेगी। अब देखना होगा कि पांच साल से लंबित इस पुल के पुनर्निर्माण को लेकर प्रशासन की पहल कब धरातल पर उतरती है।







