चंपावत: उत्तराखंड के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना रहा है। चंपावत जिले के नेपाल सीमा से लगे बकोड़ा गांव से एक बार फिर ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां 80 वर्षीय बुजुर्ग को इलाज के लिए ग्रामीणों ने डंडे के सहारे बांधकर करीब आठ किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाया, जिसके बाद वाहन से उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
बताया जा रहा है कि बकोड़ा गांव निवासी 80 वर्षीय दीवान सिंह के पैर में किसी नुकीली वस्तु के चुभने से गंभीर दर्द होने लगा। हालत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी, लेकिन गांव तक सड़क न होने के कारण ग्रामीणों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। ऐसे में ग्रामीणों ने बुजुर्ग को डंडे के सहारे बांधकर कंधों पर उठाया और लगातार बारिश के बीच करीब आठ किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाया।
बारिश के बीच दो घंटे तक कंधों पर ढोया
ग्रामीणों ने बताया कि खराब मौसम और फिसलन भरे रास्तों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। करीब दो घंटे की कठिन यात्रा के बाद बुजुर्ग को सड़क तक लाया गया। इसके बाद वाहन की मदद से उन्हें लगभग 35 किलोमीटर दूर टनकपुर उपजिला चिकित्सालय पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार कराया गया।
इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में ग्रामीण बुजुर्ग को डंडे के सहारे कंधों पर उठाकर दुर्गम रास्तों से ले जाते दिखाई दे रहे हैं।
2012 से सड़क का इंतजार कर रहे ग्रामीण
बकोड़ा गांव समेत तल्लादेश क्षेत्र के ग्रामीण वर्षों से सड़क सुविधा की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार लोगों को डोली या इसी तरह अस्थायी व्यवस्था के सहारे सड़क तक लाना पड़ता है।
ग्राम प्रधान रवींद्र रावत ने बताया कि सड़क बनने से अकेड़ी, मोस्टा, ग्वानी और बकोड़ा सहित कई गांवों की 500 से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि सड़क के अभाव में लोगों का पलायन भी लगातार बढ़ रहा है।
“सड़क नहीं होने से मरीजों और घायलों को आज भी डोली या डंडे के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। सड़क बनने से क्षेत्र के कई गांवों की 500 से अधिक आबादी को लाभ मिलेगा।”
— रवींद्र रावत, ग्राम प्रधान, बकोड़ा गांव
सड़क परियोजना को मंजूरी का इंतजार
ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बीच पीएमजीएसवाई विभाग ने सड़क निर्माण को लेकर प्रक्रिया पूरी होने की बात कही है।
पीएमजीएसवाई चंपावत के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सिंह बोहरा के अनुसार, 22.30 किलोमीटर लंबी मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क परियोजना से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। करीब 18.30 करोड़ रुपये की डीपीआर स्वीकृति के लिए भारत सरकार को भेजी गई है। साथ ही वन भूमि से जुड़े प्रस्ताव भी अपलोड किए जा चुके हैं।
“22.30 किलोमीटर लंबी मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क की डीपीआर स्वीकृति के लिए भेजी गई है। वन स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।”
— वीरेंद्र सिंह बोहरा, ईई, पीएमजीएसवाई चंपावत
विकास के दावों पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2012 से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया। ऐसे में हर आपात स्थिति में लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों को अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। खास बात यह है कि यह क्षेत्र उस विधानसभा का हिस्सा है, जिसका प्रतिनिधित्व स्वयं मुख्यमंत्री करते हैं।
बकोड़ा गांव की यह तस्वीर एक बार फिर पहाड़ के दूरस्थ इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर करती है और सवाल खड़े करती है कि आखिर कब तक ग्रामीणों को इलाज के लिए ऐसे संघर्ष से गुजरना पड़ेगा।







