पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड के वीवीआईपी जिले कहे जाने वाले पौड़ी गढ़वाल से एक बार फिर ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पहाड़ों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में ग्रामीण एक बीमार महिला को कंधों पर उठाकर नदी पार कर अस्पताल पहुंचाते नजर आ रहे हैं। सड़क और पुल के अभाव में ग्रामीणों को मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ी।
विडंबना यह है कि पौड़ी गढ़वाल जिले ने उत्तराखंड को पांच मुख्यमंत्री, कई मंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दिए हैं। वर्तमान में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री का संबंध भी इसी जिले से है। इसके बावजूद जिले के कई गांव आज भी सड़क और पुल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
बीरोंखाल ब्लॉक का मामला, पुल न होने से बढ़ी मुश्किल
बताया जा रहा है कि मामला बीरोंखाल ब्लॉक के ग्राम डांगू मल्लाका का है। ग्रामीणों के अनुसार खतलगढ़ क्षेत्र में पुल नहीं होने के कारण गांव की 60 वर्षीय महिला लक्ष्मी देवी को अस्पताल पहुंचाने के लिए पहले नदी पार करनी पड़ी और फिर पैदल रास्ते से सड़क तक ले जाया गया।
वीडियो में ग्रामीण महिला को कंधों पर उठाकर उफनते पानी और दुर्गम रास्तों से गुजरते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य पहाड़ के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य और सड़क सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को बयां करता है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी तस्वीरें
चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कमलिया पल्ला गांव का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति अपनी बीमार पत्नी को करीब छह से सात किलोमीटर तक कंधे पर उठाकर सड़क तक ले जाता दिखाई दिया था।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर वर्षों से सड़क की मांग कर रहे ग्रामीणों की समस्याओं का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है।
ग्राम प्रधान ने बताई ग्रामीणों की मजबूरी
ग्राम प्रधान रेखा रावत ने बताया कि गांव में 200 से अधिक परिवार रहते हैं, लेकिन सड़क सुविधा के अभाव में मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
“गांव निवासी 60 वर्षीय लक्ष्मी देवी को सांस लेने में तकलीफ होने पर ग्रामीणों ने मिलकर उन्हें नदी पार कर अस्पताल पहुंचाया। गांव में सड़क नहीं होने के कारण लोगों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। जंगल के रास्ते करीब दो किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार कर सड़क तक पहुंचना पड़ता है।”
– रेखा रावत, ग्राम प्रधान
उन्होंने बताया कि पानी वाले रास्ते से सड़क की दूरी लगभग एक किलोमीटर है और रास्ता अपेक्षाकृत आसान होने के कारण ग्रामीण मरीजों को उसी मार्ग से ले जाते हैं।
पीडब्ल्यूडी मंत्री के क्षेत्र में सड़क को लेकर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के विधायक और प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज के कार्यकाल में भी कई गांव सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। लोगों का कहना है कि वर्षों से सर्वे, प्रस्ताव और आश्वासन तो मिलते रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
उक्रांद नेता ने साधा निशाना
इस मुद्दे पर उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के नेता बलवंत गुसाईं ने भी सरकार और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाए हैं।
“चौबट्टाखाल में सड़क के लिए ग्रामीणों के संघर्ष की तस्वीरें नई नहीं हैं। वर्षों से लोग सड़क की मांग कर रहे हैं। क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल आश्वासन दिए गए हैं।”
– बलवंत गुसाईं, उक्रांद नेता
उन्होंने कहा कि लगभग दस वर्षों से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद ग्रामीणों को सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी उठे सवाल
वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि जब किसी मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए पहले नदी पार करनी पड़े और फिर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़े, तो आपातकालीन चिकित्सा सुविधा का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ के लोगों को आज भी इलाज के लिए मरीजों को कंधों पर उठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ रहा है, जो विकास के दावों पर सवाल खड़ा करता है।
सड़क निर्माण को लेकर क्या कह रहा है विभाग?
लोक निर्माण विभाग बैजरों के अधिशासी अभियंता लोकेश सारस्वत ने बताया कि सड़क निर्माण की प्रक्रिया चल रही है।
“भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया के लिए शासन को फाइल भेजी गई है। अनुमति मिलने के बाद सड़क की डीपीआर तैयार की जाएगी। वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। मुख्य सड़क से गांव की दूरी करीब तीन किलोमीटर है।”
– लोकेश सारस्वत, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और जल्द से जल्द गांव को सड़क सुविधा से जोड़ा जाए। उनका कहना है कि हर बार मरीजों को कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाना न केवल जोखिम भरा है, बल्कि यह पहाड़ों में बुनियादी सुविधाओं की कमी की दर्दनाक तस्वीर भी पेश करता है।
पौड़ी गढ़वाल से सामने आया यह वीडियो एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर विकास की मुख्यधारा से दूर बसे गांवों तक सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं कब पहुंचेंगी।







