हरिद्वार: कांवड़ मेला संपन्न होने के बाद धर्मनगरी हरिद्वार में वायरल बुखार, खांसी, जुकाम, आंखों के संक्रमण और डायरिया जैसी बीमारियों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी अस्पतालों और क्लीनिकों तक मरीजों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। मेला अस्पताल में इन दिनों प्रतिदिन 500 से 600 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जिनमें अधिकांश लोग वायरल संक्रमण और मौसम जनित बीमारियों से पीड़ित हैं।
कांवड़ मेले के बाद बढ़ी स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें
इस वर्ष कांवड़ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं ने हरिद्वार पहुंचकर गंगा जल भरा और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। भारी भीड़ के चलते शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कूड़ा-कचरा, गंदा पानी और स्वच्छता से जुड़ी चुनौतियां सामने आई थीं। हालांकि मेले के समापन के बाद प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने व्यापक सफाई अभियान चलाया, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि हर वर्ष मेले के बाद संक्रमण और बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
स्थानीय निवासी प्रवेश गुप्ता का कहना है कि कांवड़ मेले में देशभर से करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बाद स्वाभाविक रूप से गंदगी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिससे विभिन्न बीमारियां फैलने लगती हैं।
वहीं स्थानीय निवासी सुनील प्रजापति का कहना है कि बरसात के मौसम में वायरल संक्रमण पहले से ही सक्रिय रहता है। ऐसे में बड़ी भीड़ के बाद संक्रमण फैलने की आशंका और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने लोगों से सावधानी बरतने और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
मेला अस्पताल में रोज पहुंच रहे 500 से 600 मरीज
हरिद्वार के बिल्केश्वर रोड स्थित सरकारी मेला अस्पताल में इन दिनों मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार रोजाना करीब 500 से 600 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, खांसी, डायरिया, पेट संबंधी संक्रमण और टाइफाइड जैसे लक्षण वाले मरीजों की संख्या अधिक है।
सीएमएस डॉ. शशिकांत ने बताया कि कांवड़ मेले के दौरान तो मरीजों की संख्या बढ़ती ही है, लेकिन वर्तमान में सामने आ रहे अधिकांश मामले मानसून और मौसम में लगातार बदलाव के कारण होने वाले वायरल संक्रमण से जुड़े हैं।
“कांवड़ मेले के दौरान मरीजों की संख्या बढ़ती है, लेकिन मेले के बाद स्थिति सामान्य हो जाती है। फिलहाल बारिश और मौसम में बदलाव के कारण वायरल बुखार, डायरिया और टाइफाइड के मामले बढ़ रहे हैं।”
— डॉ. शशिकांत, सीएमएस, मेला अस्पताल
मेला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. मनीष के अनुसार उनके पास प्रतिदिन 25 से 30 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें वायरल बुखार, खांसी और जुकाम की शिकायत है।
निजी अस्पतालों में भी बढ़ी भीड़
सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से आंखों के संक्रमण और वायरल बुखार के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल गर्ग ने बताया कि हर वर्ष कांवड़ मेले के बाद संक्रमण संबंधी बीमारियों के मामले सामने आते हैं। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन और लगातार हो रही बारिश के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि बरसात का मौसम स्वयं कई प्रकार के संक्रमणों को बढ़ावा देता है, इसलिए लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
डॉक्टरों ने दी सावधानी बरतने की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान मौसम में लोगों को साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। दूषित पानी और खुले खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। साथ ही हाथों की नियमित सफाई, उबला या स्वच्छ पानी पीना और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सतर्कता बरतना जरूरी है।
डॉक्टरों ने आंखों में संक्रमण से बचाव के लिए रात में हल्के गुनगुने पानी से आंखों की सफाई करने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आई ड्रॉप का उपयोग करने की सलाह दी है।
मानसून बना संक्रमण की बड़ी वजह
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि वर्तमान में बढ़ रहे अधिकांश मामले मानसून के दौरान होने वाले वायरल संक्रमण से जुड़े हैं। लगातार बारिश, नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण बुखार, खांसी, जुकाम, डायरिया और आंखों के संक्रमण तेजी से फैल रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की है।







