चमोली: उत्तराखंड में अगस्त माह समाप्ति की ओर है और मानसून की विदाई का समय भी नजदीक आ चुका है, लेकिन पहाड़ों में बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार देर रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद चमोली जिले के देवाल क्षेत्र में भूस्खलन और भू-धंसाव की घटनाएं सामने आई हैं। देर रात हुए भू-धंसाव ने ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ा दी हैं और कई परिवारों के सिर पर खतरा मंडराने लगा है।
सेलखोला में भू-धंसाव से फैली दहशत
विकासखंड मुख्यालय देवाल बाजार के ठीक ऊपर स्थित सेलखोला क्षेत्र में एक बार फिर जमीन धंसने की घटना सामने आई है। लगातार हो रहे भू-धंसाव के कारण आसपास की बस्तियों में रहने वाले लोग दहशत में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पहले भी भू-धंसाव की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन अब बारिश के बाद स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
दस परिवारों पर मंडरा रहा खतरा
जानकारी के अनुसार, सेलखोला क्षेत्र में हुए भूस्खलन और भू-धंसाव से करीब दस परिवार सीधे खतरे की जद में आ गए हैं। ग्राम प्रधान कविता मिश्रा ने बताया कि प्रभावित ग्रामीण लंबे समय से सुरक्षित स्थान पर विस्थापन की मांग कर रहे हैं, लेकिन पिछले एक वर्ष से उनकी मांग लंबित पड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि लगातार हो रही बारिश के कारण जमीन में दरारें बढ़ रही हैं और अब लोगों के घरों को भी खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में ग्रामीणों के मन में हर समय अनहोनी की आशंका बनी हुई है।
देवसारी गांव में भी भय का माहौल
देवाल क्षेत्र के देवसारी गांव के रोयाणा तोक में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। गांव के नीचे लगातार भूस्खलन होने से एक दर्जन से अधिक परिवारों पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गुरुवार रात भारी बारिश के बीच उन्होंने पूरी रात जागकर बिताई।
लोगों को डर था कि कहीं जमीन खिसकने से कोई बड़ा हादसा न हो जाए। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ दरक रहे हैं और भू-धंसाव का दायरा बढ़ता जा रहा है।
नदियों का बढ़ा जलस्तर
लगातार बारिश का असर पिंडर घाटी क्षेत्र में भी देखने को मिला। पिंडर, कैल और प्राणमती नदियों का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
सड़कें भी हुईं बाधित
भारी बारिश के चलते क्षेत्र की कई सड़कें भी प्रभावित हुई हैं। लोक निर्माण विभाग थराली के अधिशासी अभियंता मनीष डोगरा ने बताया कि बारिश के कारण राजकीय मार्ग संख्या-90 थराली-देवाल-वाण और राजकीय मार्ग संख्या-91 ग्वालदम-नंदकेशरी सहित डिवीजन की कई सड़कें जगह-जगह मलबा आने से बाधित होती रहीं।
उन्होंने बताया कि विभाग की टीमें लगातार सड़कों को खोलने के कार्य में जुटी हुई हैं और जहां-जहां मार्ग बंद हुए हैं, वहां मशीनों के माध्यम से मलबा हटाने का काम किया जा रहा है।
विस्थापन की मांग तेज
लगातार बढ़ रहे भू-धंसाव और भूस्खलन की घटनाओं के बीच प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षित स्थान पर विस्थापन की मांग एक बार फिर तेज कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि हर बारिश उनके लिए डर और असुरक्षा लेकर आती है। ऐसे में समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों के लोग भय और अनिश्चितता के माहौल में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।







