चमोली: मां नंदा की लोकजात यात्रा की तैयारियों के बीच नंदानगर विकासखंड का सुंग गांव एक बार फिर आस्था और श्रद्धा का केंद्र बन गया है। करीब ढाई दशक के अंतराल में इस गांव में तीसरी बार चौसिंग्या खाड़ू (चार सींग वाला मेढ़ा) जन्मा है, जिसे स्थानीय लोग मां नंदा की विशेष कृपा और शुभ संकेत मान रहे हैं। इस बार जन्मा चौसिंग्या खाड़ू आगामी 5 सितंबर को निकलने वाली मां नंदा की बड़ी जात यात्रा में अगुवाई करते हुए कैलाश की ओर प्रस्थान करेगा।
उपप्रधान की गौशाला में हुआ चौसिंग्या खाड़ू का जन्म
जानकारी के अनुसार, करीब आठ माह का चौसिंग्या खाड़ू सुंग गांव के वर्तमान उपप्रधान रमेश सिंह बिष्ट की गौशाला में जन्मा है। ग्राम प्रधान तीरथ सिंह ने बताया कि खाड़ू के जन्म के समय ही रमेश सिंह बिष्ट ने संकल्प लिया था कि यदि नंदा राजजात यात्रा का अवसर आया तो वह इस चौसिंग्या खाड़ू को मां नंदा को समर्पित करेंगे। अब यात्रा का समय आने पर उनका यह संकल्प पूरा होने जा रहा है।
पहले भी दो बार सुंग गांव से निकला चौसिंग्या खाड़ू
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2000 में सुंग गांव के बिलोख सिंह के यहां चौसिंग्या खाड़ू का जन्म हुआ था। इसके बाद वर्ष 2014 में केदार सिंह बिष्ट के यहां भी चौसिंग्या खाड़ू पैदा हुआ था। दोनों अवसरों पर यही खाड़ू नंदा राजजात यात्रा का हिस्सा बने थे। अब तीसरी बार इसी गांव में चौसिंग्या खाड़ू के जन्म लेने से ग्रामीणों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है।
ग्रामीण इसे मां नंदा की विशेष कृपा मानते हुए यात्रा की तैयारियों में जुट गए हैं।
3 सितंबर को कुरुड़ मंदिर पहुंचेगा चौसिंग्या खाड़ू
ग्राम प्रधान तीरथ सिंह ने बताया कि 3 सितंबर को सुंग गांव के ग्रामीण ढोल-दमाऊ और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ चौसिंग्या खाड़ू को लेकर सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर पहुंचेंगे। यहां धार्मिक रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद चौसिंग्या खाड़ू को विधिवत बड़ी जात यात्रा में शामिल किया जाएगा।
मां नंदा की यात्रा का प्रमुख आकर्षण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चौसिंग्या खाड़ू को मां नंदा की यात्रा का अगुवा और मार्गदर्शक माना जाता है। नंदा राजराजेश्वरी की उत्सव डोली के आगे चलने वाला चौसिंग्या खाड़ू यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षण का केंद्र होता है।
मान्यता है कि चौसिंग्या खाड़ू मां नंदा को उनके मायके से कैलाश तक विदा करने की परंपरा का प्रतीक है। इसलिए हर राजजात और लोकजात यात्रा में इसका विशेष महत्व होता है।
5 सितंबर को कैलाश के लिए रवाना होगी उत्सव डोली
मां नंदा राजराजेश्वरी की उत्सव डोली 5 सितंबर को कैलाश की ओर प्रस्थान करेगी। ऐसे में सुंग गांव में जन्मे चौसिंग्या खाड़ू के यात्रा में शामिल होने को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल है। स्थानीय लोग इसे सौभाग्य और धार्मिक आस्था से जुड़ा विशेष अवसर मान रहे हैं।
चौसिंग्या खाड़ू के जन्म और उसके बड़ी जात यात्रा में शामिल होने की खबर से नंदा भक्तों में उत्साह बढ़ गया है। आने वाले दिनों में सुंग गांव और कुरुड़ क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियां और श्रद्धालुओं की आवाजाही भी बढ़ने की संभावना है।







