चमोली: हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं की गोद में स्थित पवित्र होमकुंड में मां नंदा देवी बड़ी जात यात्रा-2026 का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव पूर्ण हो गया है। विशेष पूजा-अर्चना, वैदिक अनुष्ठानों और धार्मिक परंपराओं के बीच तीन चौसिंगा खाड़ुओं को कैलाश के लिए विदाई दी गई। इस भावुक रस्म के साथ बड़ी जात की मुख्य धार्मिक यात्रा संपन्न हुई और अब देव डोलियां एवं छंतोलियां अपने पारंपरिक पड़ावों से होते हुए सिद्धपीठ कुरूड़ की ओर वापसी कर रही हैं। 23 सितंबर को कुरूड़ पहुंचकर यज्ञ-अनुष्ठान के साथ यात्रा का विधिवत समापन होगा।
होमकुंड में गूंजे मां नंदा के जयकारे
16वें और तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र में स्नान एवं पूजा-अर्चना के बाद दशोली, बंड और ज्वाल्पा की नंदा देवी की डोलियां-छंतोलियां तथा तीन चौसिंगा खाड़ू होमकुंड के लिए रवाना हुए। त्रिशूली और नंदा घुंघटी पर्वत श्रृंखलाओं की तलहटी में स्थित होमकुंड पहुंचते ही पूरा क्षेत्र मां नंदा के जयकारों से गूंज उठा।
यहां पुजारी एवं पंडित मुंशी राम गौड़, दिनेश गौड़, प्रकाश गौड़, उमेश गौड़, नवीन गौड़ और प्रवीण गौड़ सहित अन्य पुजारियों ने विधि-विधान के साथ विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। इस अवसर पर बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत, कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला, समिति पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
देवी अवतरण और भावुक कैलाश विदाई
पूजा-अनुष्ठान के दौरान कई श्रद्धालुओं पर देवी-देवताओं का अवतरण हुआ, जिसे उपस्थित भक्तों ने मां नंदा का आशीर्वाद मानकर श्रद्धापूर्वक दर्शन किया। इसके बाद यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण और भावुक रस्म कैलाश विदाई संपन्न हुई।
तीनों चौसिंगा खाड़ुओं को विशेष रूप से सजाया गया और उनकी पीठ पर नंदा देवी को अर्पित किए जाने वाले पवाड़े के रूप में खाजा, कलैऊ, प्रसादी, फल-फूल, आभूषण और श्रृंगार सामग्री रखी गई। मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच चौसिंगा खाड़ुओं को कैलाश की ओर विदा किया गया। इस दौरान अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। खाड़ुओं की विदाई के साथ ही होमकुंड में बड़ी जात की मुख्य पूजा संपन्न हुई और यात्रा ने वापसी का मार्ग पकड़ लिया।
जामुन डाली से सुतोल पहुंची वापसी यात्रा
होमकुंड से लौटते हुए यात्रा 17वें और चौथे निर्जन पड़ाव जामुन डाली पहुंची, जहां रात्रि विश्राम और देवी जागरण का आयोजन किया गया। इसके बाद यात्रा जामुन डाली से रवाना होकर घने जंगलों और पर्वतीय मार्गों से होते हुए तातड़ पहुंची। यहां ध्योंसिंह देवता की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने विश्राम किया।
इसके बाद देव डोलियां और छंतोलियां 18वें आबादी वाले पड़ाव सुतोल गांव पहुंचीं, जहां ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से उनका भव्य स्वागत किया। करीब 280 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी करने के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था देखने लायक रही।
23 सितंबर को होगा विधिवत समापन
अब बड़ी जात यात्रा 19वें पड़ाव के तहत विभिन्न गांवों से होते हुए फरखेत और अन्य पारंपरिक पड़ावों की ओर बढ़ रही है। 23 सितंबर को दशोली और बंड की देव डोलियां सिद्धपीठ कुरूड़ पहुंचेंगी, जहां यज्ञ-अनुष्ठान और धार्मिक विधि-विधान के साथ श्री नंदा देवी बड़ी जात यात्रा-2026 का औपचारिक समापन किया जाएगा।
वहीं देवराड़ा-थराली क्षेत्र की वापसी यात्रा भी निर्धारित पड़ावों से आगे बढ़ रही है। उलंग्रा, बेराधार और अन्य गांवों में देवी डोली का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया जा रहा है। मंगलवार को डोली सिरमथल, टुंड्री और गोठिंड़ा गांवों की ओर रवाना होगी।
होमकुंड में संपन्न हुई बड़ी पूजा और चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश विदाई के साथ नंदा देवी बड़ी जात यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक चरण पूरा हो चुका है। अब श्रद्धालुओं की निगाहें 23 सितंबर को सिद्धपीठ कुरूड़ में होने वाले भव्य समापन समारोह पर टिकी हैं।






