चमोली: उत्तराखंड के चर्चित सकंड गांव के ग्रामीणों का गैंती-फावड़ा आंदोलन आखिरकार रंग लाता नजर आ रहा है। लंबे समय से सड़क सुविधा की मांग कर रहे ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सिंद्रवाणी-सकंड मोटर मार्ग के प्रथम चरण के निर्माण को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिल गई है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के लिए जारी शासनादेश के अनुसार 9.50 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित सड़क के प्रथम चरण हेतु 15.68 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
शासनादेश में कहा गया है कि मोटर मार्ग की कुल लंबाई 9.500 किलोमीटर होगी। प्रथम चरण के लिए स्वीकृत धनराशि के साथ चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में व्यय के लिए 10 हजार रुपये का प्रावधान भी किया गया है। शासन ने लोक निर्माण विभाग को सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर वित्तीय स्वीकृति के लिए शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं।
सड़क बनने से ग्रामीणों को मिलेगी बड़ी राहत
सिंद्रवाणी-सकंड मोटर मार्ग के निर्माण से क्षेत्र के लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलने की उम्मीद है। सड़क संपर्क मजबूत होने से ग्रामीणों को दैनिक यात्रा, परिवहन और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। साथ ही स्थानीय उत्पादों के विपणन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच में भी सुधार होने की संभावना है। शासन ने निर्माण कार्य को निर्धारित मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
जब ग्रामीणों ने खुद शुरू कर दी थी सड़क कटिंग
सकंड गांव का नाम उस समय चर्चा में आया था जब सड़क सुविधा से वंचित ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से बार-बार मांग के बावजूद समाधान न मिलने पर खुद सड़क निर्माण का बीड़ा उठा लिया था। ग्रामीणों ने गैंती, फावड़ा, बेलचा और अन्य औजारों के सहारे श्रमदान कर सड़क निर्माण का कार्य शुरू कर दिया था।
ग्रामीणों का आरोप था कि कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल ने तीन महीने के भीतर सड़क का सर्वे कराकर निर्माण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन लंबे समय तक कोई प्रगति नहीं हुई। नाराज ग्रामीणों ने यहां तक चेतावनी दी थी कि यदि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गांव को सड़क से नहीं जोड़ा गया तो वे चुनाव बहिष्कार पर विचार करेंगे।
विधायक बोले- तकनीकी अड़चनों के कारण रुका था काम
कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल ने कहा कि कई बार सर्वे होने के बावजूद विभागीय और तकनीकी अड़चनों के चलते सड़क निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा था। बाद में ग्रामीणों की सहमति से दोबारा सर्वे कराया गया, जिसके बाद अब प्रथम चरण की वित्तीय स्वीकृति मिल गई है।
ग्रामीणों को अभी भी नहीं भरोसा
हालांकि शासन की स्वीकृति मिलने के बावजूद गांव के लोगों में खास उत्साह नहीं है। ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी का कहना है कि पूर्व में भी ऐसी स्वीकृतियों की घोषणा हुई थी, लेकिन धरातल पर कोई काम शुरू नहीं हो पाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक जेसीबी मशीनों से सड़क कटिंग का काम शुरू नहीं होता, तब तक ग्रामीण इस स्वीकृति पर पूरी तरह भरोसा नहीं करेंगे।
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र बिष्ट ने कहा कि गैंती-फावड़ा आंदोलन के बाद प्रथम चरण की वित्तीय स्वीकृति जरूर मिली है और विभाग ने सर्वे कार्य भी शुरू कर दिया है, लेकिन ग्रामीण अब केवल कागजी मंजूरी नहीं बल्कि जमीन पर काम शुरू होते देखना चाहते हैं।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वर्षों से सड़क सुविधा का इंतजार कर रहे सकंड गांव में आखिर कब निर्माण कार्य शुरू होता है और ग्रामीणों का सपना हकीकत में बदलता है।






