ऋषिकेश: वन भूमि चिन्हीकरण के विरोध में उग्र प्रदर्शन, रेलवे ट्रैक पर डटे लोग, हालात बेकाबू

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ऋषिकेश और आसपास के इलाकों में वन भूमि चिन्हीकरण की कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आशंका और आक्रोश देखने को मिल रहा है। कार्रवाई के विरोध में लोग सड़कों से उतरकर रेलवे ट्रैक पर बैठ गए हैं, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। मनसा देवी रेलवे फाटक के पास सैकड़ों की संख्या में लोग ट्रैक पर डटे हुए हैं, जिनमें महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक बताई जा रही है।

मनसा देवी रेलवे फाटक पर तनावपूर्ण माहौल

वन विभाग की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई से नाराज लोगों ने रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। “जान जाए पर जमीन हाथ से न जाए” जैसे नारों के साथ लोग ट्रैक पर बैठे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि रेल यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया।

मौके पर भारी पुलिस बल, पीएसी भी तैनात

प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। हालात बिगड़ने पर पुलिस और अन्य सुरक्षा कर्मियों को पीछे हटना पड़ा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठियां फटकार कर खदेड़ने की कोशिश की गई, लेकिन भीड़ मौके पर डटी रही। स्थिति बेकाबू होती नजर आ रही है। हालात को संभालने के लिए पीएसी की टीम को भी मौके पर बुला ली गई है। घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंच चुकी है और कई शासनिक व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।

पथराव से और बिगड़े हालात

प्रदर्शन के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में भीड़ में से किसी ने पुलिस पर पत्थर फेंक दिया। इसके बाद पथराव की स्थिति बन गई, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जीआरपी की टीम भी मौके पर पहुंची। प्रशासन हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है।

ट्रेनों का संचालन प्रभावित, यात्रियों की फजीहत

रेलवे ट्रैक पर धरने के चलते कोच्चिवली से आने वाली और योग नगरी स्टेशन से जाने वाली गंगानगर एक्सप्रेस करीब डेढ़ घंटे तक ट्रैक पर खड़ी रही। इसके चलते यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इन ट्रेनों के रुकने से अन्य ट्रेनों के संचालन पर भी असर पड़ा है।

वन भूमि पर हो रहा सर्वे, लोग जता रहे आपत्ति

एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग और जिला कलेक्टर को वन विभाग की खाली पड़ी भूमि का सर्वे कर उसे कब्जे में लेने के आदेश दिए हैं। इसी क्रम में वन विभाग द्वारा खाली पड़ी वन भूमि को चिन्हित करने की कार्रवाई की जा रही है, जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद ऋषिकेश क्षेत्र की लगभग 2,866 एकड़ भूमि से जुड़ा है, जिसे 26 मई 1950 को 99 साल की लीज पर पशु लोक सेवा मंडल संस्थान को दिया गया था। लीज की अवधि वर्ष 2049 तक निर्धारित है। शर्तों के अनुसार भूमि का उपयोग पशुपालन, उद्यान, चारा उत्पादन और अन्य निर्धारित उद्देश्यों के लिए होना था।

लेकिन समय के साथ सामने आया कि लीज पर दी गई भूमि का उपयोग तय उद्देश्यों के बजाय अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में किया गया। साथ ही इस भूमि को कथित तौर पर सबलेट भी कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

इन तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने वन भूमि पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण को लेकर राज्य सरकार पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों में हो रहे अवैध कब्जों की गहन जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

शासन ने गठित की पांच सदस्यीय समिति

सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद उत्तराखंड शासन ने पूरे मामले की जांच के लिए औपचारिक रूप से एक समिति का गठन किया है। शासन से गठित इस पांच सदस्यीय समिति की अध्यक्षता मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) धीरज पांडे को सौंपी गई है। समिति में सीएफ शिवालिक, देहरादून डीएफओ, एडीएम (वित्त) और ऋषिकेश एसडीएम को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

यह समिति आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए गूगल मैप के माध्यम से जमीन की मौजूदा स्थिति का अध्ययन करेगी। इसके साथ ही लीज से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स की भी गहन जांच की जाएगी। समिति भूमि का स्थलीय निरीक्षण भी कर रही है, ताकि धरातल पर वास्तविक स्थिति का आकलन कर तथ्यात्मक जानकारी जुटाई जा सके।

जनप्रतिनिधियों का पक्ष

इस मामले को लेकर पार्षद अभिनव सिंह मलिक ने कहा,

“यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर हो रही है। खाली भूमि को चिन्हित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें अभी घबराने की जरूरत नहीं है। 5 जनवरी को मामले में दूसरी सुनवाई होनी है, जिसका सभी को इंतजार है। बैठक में यह भी तय किया गया है कि जरूरत पड़ने पर एक कमेटी का गठन कर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा जाएगा।”

जन संवाद और विशेष सत्र की मांग

प्रदर्शनकारियों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जल्द ही एक विशाल जनसभा आयोजित कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वन मंत्री सुबोध उनियाल को जन संवाद के लिए आमंत्रित किया जाएगा। साथ ही लोगों ने मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि वन भूमि पर काबिज क्षेत्रों को विशेष कानून के तहत अधिकार देने के लिए तत्काल विशेष सत्र बुलाया जाए।

फिलहाल ऋषिकेश में वन भूमि चिन्हीकरण को लेकर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। रेलवे ट्रैक जाम, पथराव और भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बना हुआ है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और समिति की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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